रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक ने काबिनी बांध से छोड़ा पानी, कावेरी जल विवाद के बीच तमिलनाडु को राहत की उम्मीद

कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद कर्नाटक ने अपने काबिनी जलाशय से लगभग 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है, जिससे तमिलनाडु में जल संकट की चिंता कुछ कम हुई है। समाचार एजेंसी IANS की…

कर्नाटक ने काबिनी बांध से छोड़ा पानी, कावेरी जल विवाद के बीच तमिलनाडु को राहत की उम्मीद
(फोटो: IANS)

कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद कर्नाटक ने अपने काबिनी जलाशय से लगभग 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है, जिससे तमिलनाडु में जल संकट की चिंता कुछ कम हुई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीद है कि यह पानी सोमवार तक तमिलनाडु की सीमा पर स्थित बिलीगुंडलू गेजिंग स्टेशन तक पहुंच जाएगा।

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यह कदम दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया है। तमिलनाडु के अधिकारियों का आरोप था कि कावेरी जल विनियमन समिति और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के बावजूद कर्नाटक पानी छोड़ने में देरी कर रहा था। हालांकि, लगातार बारिश ने कर्नाटक के जलाशयों की स्थिति में काफी सुधार किया है।

जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि

काबिनी जलाशय के जलस्तर के आंकड़ों से स्थिति की गंभीरता का पता चलता है। 1 जुलाई को 19,516 मिलियन क्यूबिक फीट (एमसीएफटी) क्षमता वाले इस बांध में सिर्फ 26.59 प्रतिशत पानी था। लगातार बारिश के कारण 15 जुलाई तक यह बढ़कर 61.63 प्रतिशत हो गया और 31 जुलाई तक यह अपनी कुल क्षमता के 82.65 प्रतिशत तक भर गया, जबकि पानी की आवक 9,133 क्यूसेक तक पहुंच गई। काबिनी के अलावा कृष्णराज सागर (केआरएस) जलाशय में भी पानी की आवक बढ़ी है।

मेत्तूर तक कब पहुंचेगा पानी?

जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के अधिकारियों का अनुमान है कि बिलीगुंडलू पहुंचने के बाद पानी को मेत्तूर जलाशय तक पहुंचने में मंगलवार या बुधवार तक का समय लग सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सटीक समय नदी के मार्ग की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। हाल के दिनों में कावेरी बेसिन के कई हिस्से सूखे रहे हैं, जिससे पानी के प्रवाह की गति धीमी हो सकती है और वाष्पीकरण से भी जल का नुकसान हो सकता है। शनिवार को मेत्तूर जलाशय में 35.774 टीएमसीएफटी पानी था, जो इसकी कुल 93.470 टीएमसीएफटी क्षमता का 38.27 प्रतिशत है।

किसानों की नजरें बांध पर

इस पानी के छोड़े जाने से कावेरी डेल्टा के किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो फसल के मौसम से पहले पानी की उपलब्धता पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। चूंकि काबिनी और केआरएस दोनों जलाशय अपनी पूरी क्षमता के करीब पहुंच रहे हैं, इसलिए अगर भारी बारिश जारी रहती है तो कर्नाटक को और भी पानी छोड़ना पड़ सकता है, जिससे तमिलनाडु को अतिरिक्त लाभ होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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