शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
देश

तमिलनाडु में जनगणना 2027 की शुरुआत, पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया

तमिलनाडु में जनगणना 2027 का पहला चरण शनिवार से शुरू हो गया है, जिसके तहत महीने भर तक घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा की जाएगी। यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…

तमिलनाडु में जनगणना 2027 की शुरुआत, पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में जनगणना 2027 का पहला चरण शनिवार से शुरू हो गया है, जिसके तहत महीने भर तक घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा की जाएगी। यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रक्रिया में पारंपरिक कागज-कलम की जगह एक विशेष मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।

विज्ञापन

इस चरण को 'हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस' (घरों की सूची और आवास जनगणना) नाम दिया गया है, जो 1 अगस्त से 30 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान पूरे राज्य के हर घर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। यह डेटा भविष्य की जनसंख्या जनगणना के लिए आधार तैयार करेगा, जो योजना और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कैसे काम करेगी यह प्रक्रिया?

इस बड़े अभियान के लिए राज्य भर में 1.15 लाख से अधिक गणनाकर्मी (एन्यूमरेटर) तैनात किए गए हैं। काम की निगरानी और सुचारू संचालन के लिए लगभग 19,000 सुपरवाइजर भी नियुक्त किए गए हैं। प्रशासनिक सुविधा के लिए राज्य को 1,026 क्षेत्रों में बांटा गया है, जिसमें करीब 1.2 लाख हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाए गए हैं।

गणनाकर्मी हर घर जाकर 33 सवालों की एक सूची के आधार पर जानकारी जुटाएंगे। इन सवालों में घर की स्थिति, निर्माण सामग्री, मालिकाना हक, पीने के पानी, बिजली, रसोई गैस और संचार सुविधाओं जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी जानकारी शामिल है।

तकनीक और डेटा सुरक्षा

अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से डेटा की सटीकता बढ़ेगी, प्रोसेसिंग का समय घटेगा और गलतियों की संभावना कम होगी। एकत्र की गई सारी जानकारी 'जनगणना अधिनियम, 1948' के तहत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसके अलावा, डेटा का डिजिटल संग्रह 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' के नियमों के अनुरूप है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि नागरिकों की जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और नीति-निर्माण के लिए ही किया जाएगा।

अभियान शुरू होने से पहले, 17 से 31 जुलाई के बीच एक 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' सुविधा भी दी गई थी। इस दौरान 10 लाख से ज़्यादा परिवारों ने ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए अपनी जानकारी खुद जमा की। अधिकारियों ने इन परिवारों से कहा है कि जब गणनाकर्मी उनके घर आएं, तो वे सत्यापन के लिए अपना 'सेल्फ-एन्यूमरेशन आइडेंटिफिकेशन नंबर' तैयार रखें। जिन लोगों ने इस सुविधा का उपयोग नहीं किया, उन्हें घर-घर जाकर होने वाले सर्वे में शामिल किया जाएगा।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →