मंगलवार, 4 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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जम्मू-कश्मीर: इस साल बादल फटने की 35 घटनाओं ने मचाई तबाही, 31 लोगों की गई जान

जम्मू-कश्मीर इस साल अभूतपूर्व मौसमी आपदाओं का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में 2024 की गर्मियों में अब तक बादल फटने की 35 विनाशकारी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें…

जम्मू-कश्मीर: इस साल बादल फटने की 35 घटनाओं ने मचाई तबाही, 31 लोगों की गई जान
(फोटो: IANS)

जम्मू-कश्मीर इस साल अभूतपूर्व मौसमी आपदाओं का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में 2024 की गर्मियों में अब तक बादल फटने की 35 विनाशकारी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 31 लोगों की मौत हो गई है। ये घटनाएं अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक चिंताजनक हकीकत बन गई हैं।

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इन घटनाओं ने पहाड़ी इलाकों में जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे कई जिलों में तबाही का मंजर है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में पुंछ, राजौरी, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़ (चिनाब घाटी) शामिल हैं। कश्मीर घाटी में भी शोपियां, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, अनंतनाग (पहलगाम) और गांदरबल में ऐसी ही घटनाएं और भूस्खलन देखे गए हैं।

हाल की प्रमुख घटनाएं और नुकसान

1 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के छत्रू इलाके में बादल फटने से आई भीषण बाढ़ में मलबा, उखड़े पेड़ और पत्थर बहकर रिहायशी इलाकों और बाजार तक पहुंच गए। इससे कई घरों में दरारें आ गईं, दुकानें डूब गईं और गाड़ियां बह गईं। वहीं, पिछले चार दिनों में अकेले शोपियां जिले में ही तीन बार बादल फटने की घटनाएं हुईं, जिससे बद्रहामा, पहलपोरा और हीरपोरा इलाकों में भारी नुकसान हुआ। इन आपदाओं के कारण दर्जनों घर, स्कूल, दुकानें, सिंचाई नहरें और खेत या तो बह गए हैं या पानी में डूब गए हैं।

मानवीय क्षति और बचाव कार्य

इन प्राकृतिक आपदाओं, जिनमें बादल फटना, अचानक बाढ़ और भूस्खलन शामिल हैं, में कुल 31 लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में, कुपवाड़ा जिले के लोलाब इलाके में हिमली में बादल फटने के बाद 52 वर्षीय नसीमा बेगम की एक नाले के पास फिसलने से मौत हो गई। प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें लगातार बचाव, राहत और बहाली के काम में जुटी हुई हैं। मलबे के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कई अहम सड़कें अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं।

आपदाओं के पीछे के कारण

जानकारों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे स्थानीय और वैश्विक, दोनों तरह के कारण जिम्मेदार हैं। स्थानीय स्तर पर, पहाड़ों की कटाई, वनों की कटाई और संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य पहाड़ों की ढलानों को अस्थिर कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। तापमान में हर एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से हवा में नमी धारण करने की क्षमता लगभग 7% बढ़ जाती है, जिससे मानसून के बादल और शक्तिशाली हो जाते हैं। अरब सागर और हिंद महासागर की सतह का गर्म होना भी इन घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है। इन मिले-जुले कारकों की वजह से जम्मू-कश्मीर में लोगों के लिए बादल का घिरना भी अब एक डर का सबब बन गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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