शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

सेमीकॉन इंडिया 2.0: भारत में चिप डिजाइन और घरेलू तकनीक को मिलेगी नई शक्ति, सरकार ने दी 1.27 लाख करोड़ की मंजूरी

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को नई गति देने के लिए सरकार ने 'सेमीकॉन 2.0' कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी है। 1.27 लाख करोड़ रुपए के विशाल बजट वाले इस कार्यक्रम का लक्ष्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और…

सेमीकॉन इंडिया 2.0: भारत में चिप डिजाइन और घरेलू तकनीक को मिलेगी नई शक्ति, सरकार ने दी 1.27 लाख करोड़ की मंजूरी
(फोटो: IANS)

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को नई गति देने के लिए सरकार ने 'सेमीकॉन 2.0' कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी है। 1.27 लाख करोड़ रुपए के विशाल बजट वाले इस कार्यक्रम का लक्ष्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और उत्पादन का एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम बनाना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का मकसद भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और देश में ही बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) विकसित करने को बढ़ावा देना है।

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यह कार्यक्रम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के पहले चरण की सफलता पर आधारित है, जिसने देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन के लिए एक मजबूत नींव रखी थी। अब सरकार का फोकस भारतीय कंपनियों को वैश्विक उत्पाद निर्माता के तौर पर स्थापित करने पर है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य

शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित IIT में आयोजित एक कार्यशाला में आईटी सचिव एस. कृष्णन ने इस कार्यक्रम के लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "सेमीकॉन 2.0 का उद्देश्य भारतीय कंपनियों को विस्तार देने, स्वदेशी तकनीक और बौद्धिक संपदा को मजबूत करने, अधिक निजी निवेश आकर्षित करने और विश्वस्तरीय चिप डिजाइन को वैश्विक स्तर के व्यावसायिक उत्पादों में बदलने का है।"

कृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी सेमीकंडक्टर क्षमताएं ऐसे उत्पादों में बदलें, जिनका डिजाइन, स्वामित्व और व्यावसायीकरण भारत में ही हो। उनका मानना है कि इससे भारत वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उत्पादों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। अब तक, सरकार 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक के कुल निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दे चुकी है।

समावेशी इकोसिस्टम पर जोर

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि 'सेमीकॉन 2.0' भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा का अगला चरण है, जिसका उद्देश्य एक ज्यादा समावेशी और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम तैयार करना है। उन्होंने बताया, "इस विस्तारित ढांचे से स्टार्टअप, स्थापित कंपनियां, विदेशी सहयोगी और निवेशक सभी भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता विकसित करने में भागीदारी कर सकेंगे।"

वहीं, इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के अध्यक्ष पंकज मोहिंदरू के अनुसार, शुरुआती सफलता के बाद अब अगला लक्ष्य भारतीय स्वामित्व वाले सेमीकंडक्टर उत्पाद और वैश्विक स्तर की तकनीकी कंपनियां तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सेमीकंडक्टर विकास को आगे बढ़ाना होगा।

इनपुट: IANS

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