जम्मू-कश्मीर: वित्तीय धोखाधड़ी के मामले घटे, लेकिन ठगी की रकम में भारी उछाल
जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान एक चौंकाने वाला ट्रेंड देखने को मिला है। जहाँ एक तरफ बैंक धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में लगातार गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ इन धोखाधड़ी में शामिल…
जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान एक चौंकाने वाला ट्रेंड देखने को मिला है। जहाँ एक तरफ बैंक धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में लगातार गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ इन धोखाधड़ी में शामिल राशि कई गुना बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में धोखाधड़ी के सिर्फ 103 मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें फंसी हुई रकम बढ़कर 193.49 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
यह जानकारी केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर दी है। इन आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 193.49 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मुकाबले बैंक केवल 6.92 करोड़ रुपये ही वसूल पाए, जिससे स्पष्ट होता है कि ठगी गई अधिकांश राशि अब भी बरामद नहीं हो सकी है।
मामलों और राशि का विरोधाभासी ट्रेंड
आंकड़ों का विश्लेषण एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। वित्त वर्ष 2023-24 में, जम्मू-कश्मीर में वित्तीय धोखाधड़ी के 467 मामले सामने आए थे, जिनमें 47.55 करोड़ रुपये शामिल थे। अगले वर्ष, 2024-25 में, मामलों की संख्या घटकर 298 रह गई, लेकिन इसमें शामिल राशि बढ़कर 81.27 करोड़ रुपये हो गई।
यह ट्रेंड 2025-26 में और भी स्पष्ट हुआ, जब मामले घटकर केवल 103 रह गए, लेकिन धोखाधड़ी की रकम दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 193.49 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वहीं, वसूली के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। बैंकों ने 2023-24 में 3.23 करोड़ रुपये और 2024-25 में 2.65 करोड़ रुपये की वसूली की थी।
लद्दाख और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
लोकसभा में प्रस्तुत RBI के इन आंकड़ों में लद्दाख के आँकड़े भी शामिल थे। लद्दाख में 2025-26 में धोखाधड़ी के आठ मामले सामने आए, लेकिन इनमें कोई वित्तीय राशि नहीं बताई गई और न ही कोई वसूली हुई। इसकी तुलना में, केंद्र शासित प्रदेश ने 2023-24 में 0.07 करोड़ रुपये के 18 मामले और 2024-25 में 0.03 करोड़ रुपये के 13 मामले दर्ज किए थे।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ये आंकड़े अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) द्वारा रिपोर्ट किए गए हैं और इनमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों का डेटा शामिल नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि RBI ऐसे मामलों के पीड़ितों को लौटाए गए या फ्रीज किए गए फंड का कोई रिकॉर्ड नहीं रखता है।
इनपुट: IANS



