गुरूवार, 5 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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राजस्थान में अवैध बजरी खनन पर लगेगी लगाम, सरकार ने बनाई 6 विशेष टास्क फोर्स

राजस्थान में जोजारी, बांडी और लूनी जैसी प्रमुख नदी घाटियों में बजरी के अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए छह विशेष कार्यबलों (टास्क…

राजस्थान में अवैध बजरी खनन पर लगेगी लगाम, सरकार ने बनाई 6 विशेष टास्क फोर्स
(फोटो: IANS)

राजस्थान में जोजारी, बांडी और लूनी जैसी प्रमुख नदी घाटियों में बजरी के अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए छह विशेष कार्यबलों (टास्क फोर्स) का गठन किया है, जो अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन टीमों का मुख्य काम निगरानी तंत्र को मजबूत करना और नियमों का सख्ती से पालन करवाना है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा ने बताया कि ये टास्क फोर्स यह सुनिश्चित करेंगी कि सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और उच्च-स्तरीय इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन हो।

कहाँ और कैसे काम करेंगी ये टीमें?

सरकार ने सिरोही, सोजत सिटी, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर और गोटन के लिए अलग-अलग टास्क फोर्स बनाई हैं। इन टीमों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ दी गई हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • नियमित निगरानी: बजरी खनन पट्टाधारकों की गतिविधियों का नियमित निरीक्षण करना।
  • नियमों का पालन: यह जांचना कि खनन कंपनियां पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का पालन कर रही हैं या नहीं।
  • गहराई की सीमा: यह सुनिश्चित करना कि खनन तीन मीटर की तय गहराई से ज्यादा न हो।
  • बफर जोन: नदी के किनारों से अनिवार्य दूरी बनाए रखने के नियम का पालन करवाना।

अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि टास्क फोर्स नियमित रूप से फील्ड का दौरा करेंगी और उल्लंघन पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई करेंगी। जल स्तर के नीचे से बजरी निकालने जैसे मामलों पर भी नजर रखी जाएगी और इसकी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

'जीरो-टॉलरेंस' नीति के तहत कार्रवाई

राज्य सरकार अवैध खनन को लेकर 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपना रही है। इसी के तहत इन कार्यबलों को भारत सरकार के 'रेत खनन के लिए प्रवर्तन और निगरानी दिशानिर्देश, 2020' के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें 'खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम' और 'राजस्थान लघु खनिज रियायत नियम, 2017' के तहत कार्रवाई करने का अधिकार भी दिया गया है।

टास्क फोर्स की संरचना

प्रत्येक टास्क फोर्स का नेतृत्व 'सहायक खनन अभियंता' रैंक का एक अधिकारी करेगा। टीम में एक भूविज्ञानी, एक माइनिंग फोरमैन और एक सर्वेयर भी शामिल होंगे। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अन्य विभागों के अधिकारियों को भी इन टीमों में जगह दी गई है। सभी टीमों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए मुख्यालय में तैनात अतिरिक्त निदेशक (सतर्कता) को 'नोडल अधिकारी' बनाया गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने साफ कहा है कि इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजस्थान डेस्क

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