अंबोली दोहरा हत्याकांड: बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी की उम्रकैद 20 साल में बदली
मुंबई के चर्चित अंबोली दोहरे हत्याकांड में 13 साल बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी जितेंद्र राणा की हत्या की दोषसिद्धि को तो बरकरार रखा, लेकिन उसकी उम्र को ध्यान…
मुंबई के चर्चित अंबोली दोहरे हत्याकांड में 13 साल बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी जितेंद्र राणा की हत्या की दोषसिद्धि को तो बरकरार रखा, लेकिन उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए आजीवन कारावास की सजा को 20 साल के सश्रम कारावास में बदल दिया है। इस सजा के दौरान उसे कोई वैधानिक छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, दो सह-आरोपियों को हत्या के इल्जाम से बरी कर दिया गया है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक और न्यायमूर्ति संदीप पाटिल की खंडपीठ ने गुरुवार को यह निर्णय सुनाया। यह फैसला विशेष अदालत द्वारा 2016 में दिए गए निर्णय के खिलाफ दायर अपीलों पर आया है। मामले में एक चौथा आरोपी सतीश दुल्हाज भी था, जिसकी अपील लंबित रहने के दौरान पिछले साल मौत हो गई थी।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना अक्टूबर 2011 में अंधेरी पश्चिम के अंबोली इलाके में हुई थी। 24 वर्षीय कीनन सैंटोस और 29 वर्षीय रूबेन फर्नांडिस अपनी तीन महिला मित्रों के साथ एक रेस्तरां में थे। आरोप है कि वहां कुछ लोगों ने महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की। जब कीनन और रूबेन ने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद के बाद एक आरोपी जान से मारने की धमकी देकर गया और फिर हथियारों के साथ लौटकर आया। बाद में, एक पान की दुकान के पास कीनन और रूबेन पर चाकुओं से जानलेवा हमला किया गया। हमले में गंभीर रूप से घायल कीनन सैंटोस की 20 अक्टूबर 2011 को मृत्यु हो गई, जबकि रूबेन फर्नांडिस ने 30 अक्टूबर 2011 को अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
अदालत में क्या दलीलें दी गईं?
बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि छेड़छाड़ की घटना साबित नहीं हुई है और अभियोजन पक्ष हमले का मकसद बताने में विफल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि यह घटना अचानक हुए विवाद और उकसावे का नतीजा थी, इसलिए इसे हत्या नहीं माना जाना चाहिए।
इसके जवाब में, विशेष सरकारी वकील आबाद पोंडा ने अदालत को बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फॉरेंसिक सबूत और अन्य साक्ष्य स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि हमला कितना गंभीर और जानलेवा था। अभियोजन पक्ष ने बताया कि कीनन के शरीर पर धारदार हथियार से किए गए कई गहरे घाव थे, और उसकी मौत अत्यधिक खून बहने से हुई।
हाई कोर्ट ने किस आधार पर फैसला बदला?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने जितेंद्र राणा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराने वाले निचली अदालत के फैसले को सही माना। हालांकि, उसकी उम्र को एक महत्वपूर्ण कारक मानते हुए उम्रकैद की सजा को 20 साल के कठोर कारावास में संशोधित कर दिया।
वहीं, दो अन्य आरोपियों सुनील भोट और दीपक तिवाल के मामले में अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ हत्या के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर उन्हें हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया, लेकिन उनकी अन्य सजाएं बरकरार रखी गई हैं।
इनपुट: IANS



