महाराष्ट्र का बड़ा लक्ष्य: ऑटो हब से आगे बढ़कर 'भविष्य की मोबिलिटी' का ग्लोबल सेंटर बनना
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को पारंपरिक ऑटोमोटिव केंद्र से एक कदम आगे ले जाकर 'भविष्य की गतिशीलता' (Future Mobility) के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है…
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को पारंपरिक ऑटोमोटिव केंद्र से एक कदम आगे ले जाकर 'भविष्य की गतिशीलता' (Future Mobility) के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को यह घोषणा करते हुए कहा कि राज्य अब सिर्फ 'मेक इन महाराष्ट्र' पर ही नहीं, बल्कि 'इनोवेट इन महाराष्ट्र' पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुणे के चाकन में मर्सिडीज-बेंज के अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक जीएलसी वाहन के लॉन्च कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार अब विनिर्माण के साथ-साथ अनुसंधान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी विकास और नवाचारों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है।
राज्य की नई महत्वाकांक्षा और EV नीति
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य की महत्वाकांक्षा केवल वाहन असेंबली तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), बैटरी प्रौद्योगिकी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमोबाइल सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है। उन्होंने कहा कि भविष्य के वाहन सिर्फ चार पहियों वाली मशीनें नहीं, बल्कि कंप्यूटर, ऊर्जा प्रणाली और AI से लैस एक एकीकृत मोबिलिटी प्लेटफॉर्म होंगे, और महाराष्ट्र इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस दिशा में, राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत 2030 तक नए वाहन पंजीकरण में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राजमार्गों पर फास्ट-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे तथा समृद्धि महामार्ग पर सतत गतिशीलता कॉरिडोर जैसी पहलों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
ऑटोमोबाइल उद्योग और मर्सिडीज-बेंज की भूमिका
महाराष्ट्र पहले से ही देश का एक प्रमुख ऑटोमोटिव हब है, जिसका भारत के कुल मोटर वाहन उत्पादन में 20 प्रतिशत से अधिक का योगदान है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ क्षेत्र एक विशाल ऑटोमोटिव उद्योग क्लस्टर के रूप में विकसित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने मर्सिडीज-बेंज से आग्रह किया कि वह चाकन संयंत्र का उपयोग न केवल भारतीय बाजार, बल्कि एशियाई और वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन केंद्र के रूप में करे।
मर्सिडीज-बेंज का चाकन संयंत्र 3,200 करोड़ रुपए के निवेश से बना है, जिससे लगभग 1,200 लोगों को सीधा और सप्लायर नेटवर्क के माध्यम से लगभग 18,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास में पिछले तीन दशकों से मर्सिडीज-बेंज के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया।
इनपुट: IANS



