दिव्यांग पेंशन योजना में बड़े बदलाव: अब जन्म से मिलेगा लाभ, पात्रता का दायरा भी बढ़ा
केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए चलाई जा रही पेंशन योजना में कई अहम बदलाव किए हैं, जिससे अब पात्र बच्चों को जन्म से ही इसका लाभ मिल सकेगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…
केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए चलाई जा रही पेंशन योजना में कई अहम बदलाव किए हैं, जिससे अब पात्र बच्चों को जन्म से ही इसका लाभ मिल सकेगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। इन संशोधनों के बाद न सिर्फ न्यूनतम आयु की शर्त खत्म कर दी गई है, बल्कि दिव्यांगता का मानक भी घटाया गया है, जिससे अधिक संख्या में लोग योजना के दायरे में आ सकेंगे।
एशियाई पैरा खेलों से लौटे खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ दिन पहले कैबिनेट ने दिव्यांगजनों की पेंशन को लेकर ये महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने कहा, "हमने पेंशन की राशि बढ़ाई है और दिव्यांगता का मानक 80 प्रतिशत से 40 प्रतिशत कर दिया है। पहले पेंशन के लिए 18 वर्ष की आयु होना जरूरी था, अब जन्म से ही पात्र दिव्यांग बच्चों के लिए पेंशन का रास्ता खोल दिया है।"
कौन होगा लाभान्वित?
सरकार के इस फैसले से मुख्य रूप से तीन समूहों को फायदा होगा। पहले, गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के वे लोग जो 40 से 79 प्रतिशत के बीच दिव्यांग प्रमाणित हैं। दूसरे, BPL परिवारों के वे बच्चे जिन्हें अब 18 साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे जन्म से ही पेंशन के पात्र होंगे। तीसरे, जो लोग पहले से पेंशन पा रहे हैं, उन्हें अब बढ़ी हुई दरों पर राशि मिलेगी।
पेंशन राशि और लाभार्थियों की संख्या
नए नियमों के तहत केंद्रीय सहायता राशि को भी संशोधित किया गया है। अब 79 वर्ष तक की आयु के लाभार्थियों को 375 रुपये प्रति माह और 80 वर्ष व उससे अधिक आयु के लोगों को 625 रुपये प्रति माह की केंद्रीय सहायता मिलेगी। सरकार का अनुमान है कि इन बदलावों से लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख तक पहुंच जाएगी। गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांग व्यक्ति थे, जो उस समय की आबादी का 2.21 प्रतिशत था।
इनपुट: IANS



