बनासकांठा: PM मोदी 30 अक्टूबर को करेंगे उन्नत पशु प्रजनन केंद्र का उद्घाटन, डेयरी सेक्टर को मिलेगी नई दिशा
गुजरात के डेयरी सेक्टर और पशुपालकों के लिए 30 अक्टूबर का दिन विशेष होने जा रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनासकांठा जिले में एक अत्याधुनिक पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र राष्ट्र को समर्पि…
गुजरात के डेयरी सेक्टर और पशुपालकों के लिए 30 अक्टूबर का दिन विशेष होने जा रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनासकांठा जिले में एक अत्याधुनिक पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र राष्ट्र को समर्पित करेंगे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह केंद्र स्वदेशी पशु नस्लों में सुधार और दूध उत्पादन को क्रांतिकारी ढंग से बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
राज्य के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने डीसा के भीलडी में चल रही तैयारियों का निरीक्षण भी किया। यह केंद्र उन पांच बड़ी विकास परियोजनाओं में से एक है, जिनका उद्घाटन या शिलान्यास प्रधानमंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान करेंगे।
विज्ञान और तकनीक से बदलेगी पशुपालकों की आय
बनास डेयरी के चेयरमैन और राज्य विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने बताया कि यह केंद्र प्रधानमंत्री मोदी के उस सपने को साकार कर रहा है, जिसमें उन्होंने विज्ञान का उपयोग कर प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाकर ग्रामीण पशुपालकों की आय बढ़ाने की कल्पना की थी। उन्होंने कहा, "जो काम ब्राजील ने 100 साल में किया है, वो काम भारत 20 साल में कैसे कर पाएं, यही हमारा संकल्प है।"
325 करोड़ रुपए की लागत से 127 एकड़ में फैले इस 'भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर' (बीबीबीआरसी) को बनास डेयरी ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के तकनीकी मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' के सहयोग से विकसित किया है।
उन्नत तकनीक और लक्ष्य
इस केंद्र का लक्ष्य हर साल 25,000 उन्नत भ्रूणों का उत्पादन करना है। इसके लिए अंडाणु निष्कर्षण और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) के साथ-साथ भ्रूण स्थानांतरण जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा। शंकर चौधरी के मुताबिक, "सामान्यतः, श्रेष्ठ नस्ल की गाय एक वर्ष में केवल एक बछड़े को जन्म देती है। हालांकि, इस नई तकनीक की मदद से एक ही वर्ष में एक श्रेष्ठ नस्ल की गाय से कई बछड़े प्राप्त किए जा सकते हैं।"
इस पहल से मवेशियों की आने वाली पीढ़ियों की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार होगा और दूध उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। केंद्र का फोकस कंकरेज, गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी गायों के साथ-साथ मेहसानी, बन्नी, जाफराबादी और मुर्रा जैसी भैंसों की नस्लों पर रहेगा।
'कम पशु, बेहतर गुणवत्ता, अधिक दूध' का दृष्टिकोण
चौधरी ने कहा कि केंद्र "कम पशु, लेकिन बेहतर गुणवत्ता वाले पशु और अधिक दूध" के सिद्धांत को बढ़ावा देगा। यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब पशुपालक चारे की कमी और पालन-पोषण की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। पशुपालकों को इस केंद्र से सर्वोत्तम नस्ल के रोगमुक्त सांड, उच्च गुणवत्ता वाले वीर्य और भ्रूण किफायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनकी आय में सुधार की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



