गुजरात: डेयरी योजना से 3 साल में 29,500 आदिवासी महिलाओं की ज़िंदगी में बदलाव, मिली 162 करोड़ की मदद
गुजरात में सरकार की एक विशेष डेयरी योजना आदिवासी महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का ज़रिया बन रही है। पिछले तीन वर्षों के दौरान, इस योजना के तहत 29,500 से ज़्यादा आदिवासी महिलाओं को पशुपालन के लिए…
गुजरात में सरकार की एक विशेष डेयरी योजना आदिवासी महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का ज़रिया बन रही है। पिछले तीन वर्षों के दौरान, इस योजना के तहत 29,500 से ज़्यादा आदिवासी महिलाओं को पशुपालन के लिए कुल 162.28 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, यह मदद महिलाओं को डेयरी से जुड़ी आजीविका शुरू करने में सहयोग देती है।
यह सहायता राज्य सरकार की 'एकीकृत डेयरी विकास योजना' (Integrated Dairy Development Scheme) के अंतर्गत प्रदान की जाती है। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल की देखरेख में यह पहल लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी परिवारों को आय का एक स्थिर स्रोत देकर पलायन की मजबूरी को कम करना है।
योजना का स्वरूप और वित्तीय मदद
इस योजना में एक पशु इकाई की कुल लागत 90,000 रुपये निर्धारित की गई है। इसमें दुधारू पशु खरीदने, उसका बीमा, परिवहन, चारा, इलाज और विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण का खर्च शामिल है। लाभार्थी को इसमें सिर्फ़ 3,000 रुपये का योगदान देना होता है, जबकि बाकी राशि केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी और लोन के ज़रिए दी जाती है। फंडिंग का ढाँचा इस प्रकार है:
- ₹29,000 का लोन
- ₹29,000 केंद्र सरकार की सब्सिडी
- ₹29,000 राज्य सरकार की सहायता
योजना के तहत एक लाभार्थी दो दुधारू पशु ले सकती है, लेकिन दूसरे पशु की पात्रता पहले लोन के भुगतान पर निर्भर करती है। जब लाभार्थी पहले पशु से हुई आय से 60% से ज़्यादा लोन चुका देती है, तो वह दूसरा पशु लेने के योग्य हो जाती है।
कौन और कैसे उठा सकता है लाभ?
यह योजना गुजरात के 14 आदिवासी ज़िलों में लागू है और इसका लक्ष्य गरीबी रेखा से नीचे (0 से 20 स्कोर) जीवनयापन करने वाले आदिवासी परिवारों की महिलाएँ हैं। पात्र महिलाएँ अपने क्षेत्र के आदिवासी विकास कार्यालय के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। लाभार्थियों को पशुओं की वैज्ञानिक देखभाल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि वे स्थानीय डेयरी सहकारी समितियों को नियमित रूप से दूध की आपूर्ति कर सकें।
भविष्य की योजना और अब तक की प्रगति
आदिवासी विकास विभाग के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 65 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिससे 11,206 और महिलाओं को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य है। इसमें हर लाभार्थी को 58,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। साल 2007-08 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक राज्य की आदिवासी महिलाओं को 1.96 लाख से ज़्यादा दुधारू पशु दिए जा चुके हैं।
इनपुट: IANS



