MSME सेक्टर में गुणवत्ता और पर्यावरण क्रांति: 6.7 लाख से ज़्यादा उद्यमों को मिला ZED सर्टिफिकेशन
भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में गुणवत्ता और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देने वाली एक बड़ी पहल रंग ला रही है। केंद्र सरकार की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED)…
भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में गुणवत्ता और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देने वाली एक बड़ी पहल रंग ला रही है। केंद्र सरकार की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED) सर्टिफिकेशन योजना के तहत अब तक 6.7 लाख से ज़्यादा उद्यमों को सर्टिफ़िकेट मिल चुका है, जो बेहतर उत्पादन मानकों की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना से जुड़ने के लिए कुल 9.49 लाख MSMEs ने पंजीकरण कराया है।
ZED पहल का मूल मंत्र 'ज़ीरो डिफेक्ट' (उत्पाद में कोई कमी नहीं) और 'ज़ीरो इफेक्ट' (पर्यावरण पर कोई बुरा असर नहीं) है। इस योजना का मकसद भारतीय MSMEs को अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं, गुणवत्ता और तकनीक में लगातार सुधार करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे घरेलू और वैश्विक बाज़ार में ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकें। इस पूरी प्रक्रिया में उद्यमों की मदद के लिए सरकार अब तक 913 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय सहायता भी दे चुकी है।
महिला उद्यमियों को 100% सब्सिडी
इस योजना की एक खास बात महिला उद्यमियों को दिया जा रहा विशेष प्रोत्साहन है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, महिलाओं के स्वामित्व वाले MSMEs को ZED सर्टिफिकेशन की लागत पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इसका मतलब है कि सर्टिफिकेशन का पूरा खर्च सरकार उठा रही है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा महिला उद्यमी इस पहल से जुड़कर अपने कारोबार को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढाल सकें।
क्या है ZED सर्टिफिकेशन और इसके फायदे?
ZED सर्टिफिकेशन के तीन स्तर हैं - ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड। अब तक 6.67 लाख MSMEs को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर और 4,800 को गोल्ड सर्टिफिकेशन दिया जा चुका है। यह सर्टिफिकेशन सिर्फ एक तमगा नहीं है, बल्कि इसके कई ठोस फायदे भी हैं।
मुख्य बातें:
- आसान वित्तीय मदद: 19 वित्तीय संस्थान ZED-प्रमाणित उद्यमों को प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दरों में रियायत दे रहे हैं।
- राज्यों से प्रोत्साहन: देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस योजना को अपनी औद्योगिक नीतियों में शामिल किया है और सर्टिफाइड MSMEs को अतिरिक्त लाभ दे रहे हैं।
- आर्थिक सहायता: योजना के तहत, टेस्टिंग या सर्टिफिकेशन पर 50,000 रुपए तक, कंसल्टेंसी के लिए 2 लाख रुपए तक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक अपनाने के लिए 3 लाख रुपए तक की वित्तीय मदद का प्रावधान है।
मंत्रालय का कहना है कि यह योजना भारतीय उद्योगों में गुणवत्ता, उत्पादकता और स्थिरता की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
इनपुट: IANS



