मंगलवार, 4 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाजार: चार दिनों की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 210 अंक टूटा, RBI के फैसले से पहले निवेशक सतर्क

लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला मंगलवार को थम गया। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों के सतर्क…

शेयर बाजार: चार दिनों की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 210 अंक टूटा, RBI के फैसले से पहले निवेशक सतर्क
(फोटो: IANS)

लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला मंगलवार को थम गया। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों के सतर्क रुख के चलते भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे एक और बड़ी वजह वायदा एवं विकल्प (F&O) की एक्सपायरी के लिए लागू की गई नई व्यवस्था को माना जा रहा है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी।

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मंगलवार के कारोबार के अंत में, बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 210.08 अंक (0.27%) गिरकर 78,428.95 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी50 सूचकांक 159 अंक (0.64%) की गिरावट के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ।

किन सेक्टरों में रही कमजोरी, कहाँ दिखी तेजी?

बाजार में सेक्टोरल प्रदर्शन मिला-जुला रहा। सबसे ज्यादा दबाव रियल्टी सेक्टर पर देखा गया, जहाँ निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.39% टूट गया। इसके अलावा, तेल एवं गैस (1.15%), एफएमसीजी (0.88%), और आईटी (0.82%) शेयरों में भी बिकवाली हावी रही।

हालांकि, इस गिरावट के दौर में भी कुछ सेक्टर हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 0.91% और निफ्टी मीडिया में 2.03% की अच्छी बढ़त दर्ज की गई। व्यापक बाजारों की बात करें तो निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.29% की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.23% की बढ़त के साथ बंद हुआ।

नई F&O व्यवस्था का असर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, साप्ताहिक एक्सपायरी और F&O क्लोजिंग प्राइस तय करने की नई प्रणाली ने बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव पैदा किया। इस व्यवस्था के चलते कीमतों में अस्थिरता बढ़ गई, जिसका असर डेरिवेटिव्स बाजार में पोजीशन लेने वाले निवेशकों पर पड़ा। कई खुदरा निवेशकों को 15 मिनट की ब्लाइंड डेरिवेटिव्स क्लोजिंग विंडो से पहले अपनी पोजीशन बंद करनी पड़ी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। हालांकि, इसे शुरुआती तकनीकी चुनौती माना जा रहा है, जिसके समय के साथ सुधरने की उम्मीद है।

अब आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि बाजार की मौजूदा अस्थिरता देश के मजबूत आर्थिक संकेतकों को प्रभावित नहीं करती है। निवेशकों की नजर अब बुधवार को आने वाले RBI के मौद्रिक नीति संबंधी फैसलों पर टिकी है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी भू-राजनीतिक घटनाओं पर भी बाजार की निगाह बनी हुई है, क्योंकि वहां स्थिरता आने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है।

इनपुट: IANS

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