भारतीय ऑटोमोबाइल बाज़ार में तेज़ रफ़्तार: यात्री वाहनों की बिक्री 34% बढ़ी, इलेक्ट्रिक गाड़ियों का क्रेज़ भी बरक़रार
जुलाई का महीना भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अच्छी ख़बर लेकर आया। मज़बूत घरेलू मांग के चलते यात्री वाहनों (पैसेंजर व्हीकल्स) की थोक बिक्री में साल-दर-साल 34% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। समाचार…
जुलाई का महीना भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अच्छी ख़बर लेकर आया। मज़बूत घरेलू मांग के चलते यात्री वाहनों (पैसेंजर व्हीकल्स) की थोक बिक्री में साल-दर-साल 34% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह उछाल ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यात्री वाहनों के साथ-साथ दोपहिया और ट्रैक्टर सेगमेंट में भी मांग मजबूत बनी रही। यात्री वाहनों की बिक्री में सबसे बड़ा योगदान यूटिलिटी गाड़ियों (UVs) का रहा। इसके अलावा, बेहतर सप्लाई चेन और ग्राहकों की लगातार बनी हुई दिलचस्पी ने भी कार बनाने वाली कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाया।
विभिन्न सेगमेंट का प्रदर्शन
अगर दोपहिया वाहनों की बात करें तो इनकी होलसेल बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 15% की वृद्धि हुई, जबकि रिटेल यानी खुदरा बिक्री 34% तक बढ़ गई। इसी तरह, कमर्शियल गाड़ियों (CVs) की मांग में भी तेज़ी देखी गई। बड़ी कंपनियों की कुल CV बिक्री में साल-दर-साल क़रीब 28% का उछाल आया। इसका एक बड़ा कारण यह भी था कि कंपनियों द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा से पहले ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की।
मुनाफ़े पर दबाव और भविष्य की चिंताएँ
बिक्री के आंकड़े भले ही उत्साहित करने वाले हों, लेकिन रिपोर्ट में एक चेतावनी भी दी गई है। कमोडिटी की ऊँची कीमतों के कारण कंपनियों के मुनाफ़े (मार्जिन) पर दबाव पड़ सकता है। आँकड़ों के अनुसार, 'वित्त वर्ष 27' की पहली तिमाही में दोपहिया और यात्री वाहनों के लिए कमोडिटी लागत सूचकांक में 10-12% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, कमर्शियल वाहनों और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए यह वृद्धि लगभग 13% रही। जून तिमाही में कई वाहन निर्माताओं ने कम मुनाफ़ा दर्ज किया था और सितंबर तिमाही में भी यह दबाव बने रहने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता दबदबा
इन सबके बीच, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने का चलन लगातार मज़बूत हो रहा है। जुलाई में बिकी कुल दोपहिया गाड़ियों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की हिस्सेदारी 11.2% थी। वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों की बाज़ार में पैठ 8% दर्ज की गई।
रिपोर्ट में ग्रामीण मांग को लेकर एक अनिश्चितता भी जताई गई है। हालांकि हाल के हफ़्तों में बारिश सुधरी है, लेकिन जलाशयों का स्तर अभी भी औसत से कम है। इसके अलावा, 2026 में अल-नीनो की आशंका आने वाले महीनों में ग्रामीण मांग और ट्रैक्टर की बिक्री पर असर डाल सकती है।
इनपुट: IANS



