राजस्थान कांग्रेस में 'हाईकमान' कौन? शांति धारीवाल के बयान से फिर सतह पर आई गुटबाज़ी
राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर यह बहस तेज़ हो गई है कि पार्टी का असली 'हाईकमान' कौन है — दिल्ली में बैठा केंद्रीय नेतृत्व या पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत? यह सवाल वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल के उस…
राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर यह बहस तेज़ हो गई है कि पार्टी का असली 'हाईकमान' कौन है — दिल्ली में बैठा केंद्रीय नेतृत्व या पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत? यह सवाल वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल के उस बयान के बाद उठा, जिसमें उन्होंने गहलोत को ही राज्य में पार्टी का हाईकमान बता दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस एक बयान ने पार्टी के भीतर की गुटबाजी को फिर से हवा दे दी है और नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
धारीवाल के बयान के ठीक बाद, आगामी पंचायत और शहरी निकाय चुनावों की तैयारी के लिए जयपुर में बुलाई गई एक बैठक में पार्टी की अंदरूनी कलह सार्वजनिक हो गई। बैठक में अलग-अलग नेताओं के समर्थन में जमकर नारेबाजी हुई, जिससे संगठन में सत्ता के विभिन्न केंद्रों के बीच टकराव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
नेताओं ने अपनी ही पार्टी पर लगाए आरोप
बैठक के दौरान कई नेताओं ने विधानसभा चुनाव में मिली हार का ठीकरा पार्टी के भीतरी लोगों पर फोड़ा। मालवीय नगर से कांग्रेस की पूर्व प्रत्याशी अर्चना शर्मा ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उनकी असली लड़ाई भाजपा से नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के नेताओं से थी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से छह महीने पहले ही उनके खिलाफ साज़िश रची जाने लगी थी। इसी तरह, हवा महल के पूर्व उम्मीदवार आरआर तिवारी ने भी अपनी हार के लिए पार्टी के 'जयचंदों' को जिम्मेदार ठहराया। तिवारी ने धारीवाल का समर्थन करते हुए कहा कि हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी हाईकमान हैं, लेकिन राजस्थान की ज़मीनी हकीकत अलग है और गहलोत अपने व्यापक नेटवर्क के कारण यहां के निर्विवाद केंद्र बने हुए हैं।
नेतृत्व के दावों पर अलग-अलग सुर
धारीवाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा, "राहुल गांधी ही हाईकमान हैं। शांति धारीवाल एक वरिष्ठ नेता हैं और कुछ भी कह सकते हैं।" इस बीच, अशोक गहलोत ने खुद को इस बहस से दूर कर लिया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का फैसला करना पूरी तरह से हाईकमान का अधिकार है और इस पर चर्चा करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। गहलोत ने कहा, "हाईकमान चुनाव से पहले और बाद में सर्वे, फीडबैक और जनभावना के आधार पर फैसले लेता है।"
बैठक में गूंजते रहे अलग-अलग नारे
पार्टी की बैठक में अनुशासन बनाए रखने की अपीलें बेअसर रहीं। जयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा और विधायक रफीक खान ने कार्यकर्ताओं से केवल पार्टी और राष्ट्रीय नेतृत्व के पक्ष में नारे लगाने का आग्रह किया। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी व्यक्तिगत नेताओं के समर्थन में नारेबाजी से बचने की सलाह दी, लेकिन इसके बावजूद नारे लगते रहे, जो पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष की ओर इशारा कर रहा था। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही।
इन सबके बीच, अशोक गहलोत ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस उत्तर भारत में मजबूत है और अगले विधानसभा चुनाव में राजस्थान में सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने IANS से कहा, "हम देश के उत्तरी हिस्सों में सबसे मजबूत हैं।" साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की।
इनपुट: IANS



