राजस्थान निकाय चुनाव: 4100 से ज़्यादा सीटें जीतकर BJP का दमदार प्रदर्शन, कांग्रेस को 'नाकाम' बताया
राजस्थान के हालिया नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने प्रदर्शन को शानदार बताते हुए दावा किया है कि जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है। पार्टी प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि 10,251…
राजस्थान के हालिया नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने प्रदर्शन को शानदार बताते हुए दावा किया है कि जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है। पार्टी प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि 10,251 से ज़्यादा सीटों पर हुए इन चुनावों में भाजपा को 4,151 से अधिक सीटों पर जीत हासिल हुई है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस जनसमर्थन के लिए राजस्थान की जनता का आभार व्यक्त किया है।
गांधीनगर में दिए एक बयान में, पटेल ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के संयुक्त नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार, संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं के व्यापक प्रयासों से यह सफलता मिली है।
कोटा में राहुल गांधी का अभियान विफल: भाजपा
भाजपा प्रवक्ता ने विशेष रूप से कोटा के नतीजों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कोटा में कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा चलाया गया प्रचार अभियान पूरी तरह विफल रहा और वहां के युवाओं समेत सभी मतदाताओं ने भाजपा पर भरोसा जताया। पटेल के अनुसार, कांग्रेस का प्रचार ज़मीनी स्तर के बजाय आभासी माध्यमों पर ज़्यादा केंद्रित था, जिसका जवाब जनता ने अपने वोटों से दिया है।
'ट्रिपल इंजन' सरकार से विकास को मिलेगी गति
डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि अब स्थानीय निकायों में भी भाजपा की सरकार बनने से विकास कार्यों में तेज़ी आएगी। उन्होंने इसे 'ट्रIPLE इंजन' व्यवस्था का हिस्सा बताते हुए कहा कि केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर भाजपा की सरकारें होने से योजनाओं को लागू करने में बेहतर तालमेल बनेगा।
चुनाव प्रक्रिया और निकाय विभाजन पर कांग्रेस को घेरा
पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए कई नगर निकायों का विभाजन किया था, लेकिन उन क्षेत्रों में भी भाजपा को ही समर्थन मिला। उन्होंने इस बार के चुनाव कराने के तरीके की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह आठ अलग-अलग चरणों के बजाय इस बार एक साथ चुनाव ('वन स्टेट, वन इलेक्शन' की तर्ज पर) हुए, जिससे मतदाताओं को स्पष्ट जनादेश देने का मौका मिला और कांग्रेस अपनी रणनीति में सफल नहीं हो सकी।
इनपुट: IANS



