बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है अहम? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को एक ऐसा बड़ा कदम माना जा रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा दे सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, यह समझौता भारत को…

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है अहम? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया
(फोटो: IANS)

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को एक ऐसा बड़ा कदम माना जा रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा दे सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, यह समझौता भारत को दुनिया के सबसे बड़े और फायदेमंद बाजारों में से एक तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा, जिससे देश की आर्थिक संभावनाएं बढ़ेंगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जयशंकर सोमवार को नई दिल्ली में कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे।

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विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के लिए अब अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भारत के पिछले मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) मुख्य रूप से आसियान देशों, जापान और दक्षिण कोरिया पर केंद्रित थे। अब देश का लक्ष्य यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन जैसे अधिक पारदर्शी, परिपक्व और बेहतर क्रय शक्ति वाले बाजारों के साथ संबंध मजबूत करना है।

व्यापार में संतुलन और वैश्विक चुनौतियाँ

जयशंकर ने कहा कि अमेरिका भारत का एक प्रमुख आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा भागीदार है। उन्होंने वैश्विक व्यापार प्रणाली की चुनौतियों पर भी बात की और कहा कि बाजार में मौजूद सभी गड़बड़ियों के लिए सिर्फ वाशिंगटन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक, कई विकृतियाँ अन्य स्रोतों से भी उत्पन्न हुई हैं और उनका निष्पक्ष रूप से आकलन करने की आवश्यकता है।

भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' विदेश नीति

विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति के 'मल्टी-अलाइनमेंट' (कई देशों के साथ तालमेल) दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने चीन, रूस और खाड़ी देशों के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत या बेहतर किया है। इस नीति का उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ मौजूद अवसरों और चुनौतियों के आधार पर रिश्तों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर रिश्ता भारत के लिए फायदेमंद है और किसी एक साझेदार के साथ प्रगति करने से दूसरे मोर्चों पर भी देश के हितों को साधने में मदद मिलती है।

अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने वैश्विक सुरक्षा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत आम लोगों के जहाजों पर होने वाले हमलों को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' मानता है, चाहे वे हमले काला सागर, लाल सागर या खाड़ी क्षेत्र में हों। उन्होंने यह भी दोहराया कि रूस-यूक्रेन विवाद को सुलझाने का एकमात्र रास्ता बातचीत और कूटनीति ही है।

इनपुट: IANS

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