विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में विनियोग विधेयक पारित, कई मुद्दों पर जारी रहा गतिरोध
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विनियोग (संख्या-3)…
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 है, जो 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान हुए अतिरिक्त सरकारी खर्च को अधिकृत करने से जुड़ा है। यह राशि भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से निकाली जाएगी।
मंगलवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के प्रदर्शनों के कारण बार-बार बाधित हुई। विपक्षी सांसद राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी, 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और कावेरी जल विवाद जैसे कई मुद्दों को लेकर विरोध जता रहे थे।
शोर-शराबे में पेश हुआ एक और विधेयक
विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में विचार के लिए पेश किया। इस विधेयक के माध्यम से तीन मौजूदा कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव है: पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026।
संसदीय कार्यवाही पर असर
दिन भर चले हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा, और अंततः इसे दिन भर के लिए समाप्त कर दिया गया। सदन की अगली बैठक अब बुधवार सुबह 11 बजे होगी। इससे ठीक एक दिन पहले, सोमवार को भी लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बावजूद बिना किसी चर्चा के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित एक विधेयक पारित कर दिया था।
सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में रुकावट डाल रहे हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का मौका नहीं मिल पा रहा है। वहीं, विपक्षी दल नीट पेपर लीक विवाद और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार से जवाब, खासकर गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



