गुजरात: बाढ़ के बाद स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद, 1.74 लाख लोगों तक पहुंची मेडिकल मदद
गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ के बाद बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए राज्य का स्वास्थ्य विभाग बड़े पैमाने पर अभियान चला रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में…
गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ के बाद बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए राज्य का स्वास्थ्य विभाग बड़े पैमाने पर अभियान चला रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब तक 1.74 लाख से ज्यादा लोगों का इलाज मेडिकल कैंपों के जरिए किया जा चुका है। स्थिति पर काबू पाने के लिए हजारों निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को घर-घर जांच के लिए तैनात किया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि भारी बारिश और बाढ़ के बावजूद बीमारियों का प्रकोप काफी हद तक नियंत्रण में है और अब तक सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई बड़ी आपातकालीन स्थिति सामने नहीं आई है। विभाग ने राज्य, जिला और तालुका स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीमें सक्रिय कर दी हैं। इसके अलावा हर जिले को विशेष वाहनों और स्टाफ से लैस पांच अतिरिक्त इमरजेंसी मेडिकल टीमें भी दी गई हैं।
घर-घर निगरानी और दवा वितरण
बाढ़ का पानी उतरने के बाद पैदा होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए 18,000 से अधिक निगरानी टीमें रोजाना प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं। इन दौरों के दौरान, लोगों को 1.05 करोड़ से अधिक क्लोरीन की गोलियां और 10.29 लाख से ज्यादा ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) के पैकेट बांटे गए हैं। सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए 10.52 लाख से ज्यादा क्लोरीन टेस्ट किए गए और पाइपलाइनों में 3,061 से अधिक लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक तैयारी
राज्य सरकार के अनुसार, मॉनसून से पहले ही सभी 34 जिलों और आठ नगर निगमों में एक 'मॉनसून एक्शन प्लान' लागू कर दिया गया था, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों को तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिली। आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए 108 सेवा की 1,496 एम्बुलेंस और स्वास्थ्य केंद्रों की 816 एम्बुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया है। बिजली कटौती की स्थिति में भी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने के लिए प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जनरेटर की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों की 675 गर्भवती महिलाओं को पहले ही सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचा दिया गया था, जहां 272 सफल संस्थागत प्रसव कराए गए। इसके अलावा, राहत शिविरों में रह रहे लोगों की भी नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
मच्छर और अन्य बीमारियों की रोकथाम
मच्छर जनित बीमारियों को रोकने के लिए 497 अतिरिक्त वेक्टर कंट्रोल टीमें तैनात की गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे ज्यादा जोखिम वाले 106 गांवों में इनडोर रेसिडुअल स्प्रेइंग का पहला दौर पूरा हो चुका है। वहीं, लेप्टोस्पायरोसिस के खतरे को देखते हुए वलसाड, सूरत, नवसारी और तापी जिलों के 562 गांवों में 7.61 लाख से ज्यादा लोगों को डॉक्सीसाइक्लिन दवा दी गई है। सांप के काटने के मामलों से निपटने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों और 108 एम्बुलेंस में 1,38,234 से ज्यादा एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
इनपुट: IANS



