मुख्यमंत्री को 'हड्डियां तोड़ने' की धमकी: DMK विधायक मार्कंडेयन को शर्तों के साथ हाईकोर्ट से मिली जमानत
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित तौर पर धमकी भरा बयान देने के मामले में गिरफ्तार डीएमके विधायक जीवी मार्कंडेयन को मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी। विधायक पर आरोप था कि…
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित तौर पर धमकी भरा बयान देने के मामले में गिरफ्तार डीएमके विधायक जीवी मार्कंडेयन को मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी। विधायक पर आरोप था कि उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी के विधायक विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री की "हड्डियां तोड़ देंगे"।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस जीके इलांथिरायन ने कुछ शर्तों के साथ विधायक की नियमित जमानत याचिका मंजूर की। इसमें सबसे अहम शर्त यह है कि मार्कंडेयन भविष्य में मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह के भाषण नहीं देंगे। कोर्ट ने उन्हें इस संबंध में थूथुकुडी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
शर्तों के साथ मिली रिहाई
जमानत की शर्तों के तहत, विलाथिकुलम से विधायक मार्कंडेयन को दिन में दो बार जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। हालांकि, उन्हें उन दिनों के लिए छूट दी गई है, जब 5 अगस्त से शुरू हो रहे तमिलनाडु विधानसभा के बजट सत्र में उनकी उपस्थिति आवश्यक होगी।
सुनवाई के दौरान विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने तर्क दिया कि यह एक राजनीतिक भाषण का हिस्सा था और इस आधार पर गिरफ्तारी और लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं है। वहीं, सरकारी वकील आर. जॉन सत्यन ने अदालत को बताया कि यदि विधायक अपने बयान पर पछतावा व्यक्त करते हैं तो जमानत पर विचार किया जा सकता है।
जानें पूरा मामला
थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने 19 जुलाई को एस. बालासुब्रमण्यम की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। शिकायत 18 जुलाई को कोविलपट्टी के एक मंदिर के पास हुई डीएमके की बैठक में मार्कंडेयन द्वारा दिए गए भाषण से संबंधित थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, विधायक ने धमकी दी थी कि डीएमके विधायक "विधानसभा के अंदर मुख्यमंत्री की हड्डियां तोड़ देंगे"।
पुलिस ने मार्कंडेयन के खिलाफ आपराधिक धमकी, शांति भंग करने के इरादे से अपमान और सार्वजनिक शरारत से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। पिछले हफ्ते थूथुकुडी की एक सत्र अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद विधायक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
इनपुट: IANS



