केरल: CPI-M के बागी विधायक को हाईकोर्ट का नोटिस, 'शहीद फंड चोर' के आरोप पर मांगा जवाब
केरल में CPI-M के गढ़ कन्नूर से जुड़ी एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई अब अदालत पहुंच गई है। पय्यन्नूर विधानसभा सीट पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को हराकर विधायक बने वी. कुन्हीकृष्णन की मुश्किलें बढ़ सकती…
केरल में CPI-M के गढ़ कन्नूर से जुड़ी एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई अब अदालत पहुंच गई है। पय्यन्नूर विधानसभा सीट पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को हराकर विधायक बने वी. कुन्हीकृष्णन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि केरल हाईकोर्ट ने उन्हें एक चुनावी याचिका पर नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह याचिका उन्हीं के पूर्व सहयोगी और पूर्व विधायक टी.आई. मधुसूदनन ने दायर की है, जिन्होंने कुन्हीकृष्णन के चुनाव को रद्द करने की मांग की है।
यह मामला 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से जुड़ा है, जिसमें पय्यन्नूर से मधुसूदनन को हार का सामना करना पड़ा था। मधुसूदनन का आरोप है कि उनकी हार के पीछे एक सुनियोजित और झूठा प्रचार अभियान था।
क्या हैं याचिका के मुख्य आरोप?
अपनी याचिका में मधुसूदनन ने दावा किया है कि चुनाव के दौरान वी. कुन्हीकृष्णन के खेमे ने उन्हें जानबूझकर 'शहीद फंड चोर' के रूप में प्रचारित किया। याचिका के अनुसार, उन पर शहीदों के परिवारों के लिए इकट्ठा किए गए फंड के दुरुपयोग का झूठा आरोप लगाया गया, जबकि इसके समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया गया। मधुसूदनन का कहना है कि इस दुष्प्रचार का मकसद मतदाताओं को गुमराह करना और उनकी छवि खराब करना था, जिसका सीधा असर चुनाव के नतीजों पर पड़ा।
अदालत और विधायक का पक्ष
गुरुवार को नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह पहले इस बात की जांच करेगा कि यह चुनाव याचिका सुनवाई के योग्य है भी या नहीं, क्योंकि इसमें कुछ प्रक्रियात्मक कमियां बताई जा रही हैं। वहीं, नोटिस मिलने पर विधायक वी. कुन्हीकृष्णन ने कहा कि इस कानूनी चुनौती में कुछ भी असामान्य नहीं है। उन्होंने कहा, "किसी को भी अपनी शिकायत लेकर न्यायपालिका के पास जाने का अधिकार है। हम भी उसी के अनुसार इसका सामना करेंगे।"
CPI-M के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला सिर्फ एक चुनावी विवाद नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। पय्यन्नूर को कन्नूर जिले में CPI-M का सबसे मजबूत वैचारिक गढ़ माना जाता है। 2026 के विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए बड़ा झटका थे, जब पय्यन्नूर से कुन्हीकृष्णन और थालिपरम्बु से टी.के. गोविंदन जैसे दो बड़े बागियों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के समर्थन से चुनाव लड़ा और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों को हरा दिया। इन गढ़ों में हार पार्टी के लिए एक बड़ा झटका थी। अब जब यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में है, तो पय्यन्नूर का राजनीतिक भविष्य एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
इनपुट: IANS



