कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर, JK Tyre का मुनाफा पहली तिमाही में 73% गिरा
प्रमुख टायर निर्माता कंपनी जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज के मुनाफे में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा…
प्रमुख टायर निर्माता कंपनी जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज के मुनाफे में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा 73 फीसदी घटकर 44 करोड़ रुपए रह गया। कंपनी ने इस गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे माल की लागत में हुई तेज बढ़ोतरी को बताया है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजों के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 163 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था। हालांकि, मजबूत घरेलू मांग के दम पर कंपनी के राजस्व में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली। परिचालन से होने वाली आय 2 प्रतिशत बढ़कर 3,946 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 3,869 करोड़ रुपए थी।
मुनाफे पर दबाव और बाजार की प्रतिक्रिया
मुनाफे में गिरावट का सीधा असर कंपनी के परिचालन प्रदर्शन पर भी दिखा। तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) सालाना आधार पर 36 प्रतिशत घटकर 258 करोड़ रुपए रह गया। इसके साथ ही, EBITDA मार्जिन भी 10.4 प्रतिशत से गिरकर 6.5 प्रतिशत पर आ गया। इन नतीजों की घोषणा के बाद शुक्रवार को जेके टायर के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया और शेयर 5.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 389.45 रुपए पर बंद हुए।
घरेलू बिक्री में मजबूत वृद्धि
कच्चे माल की चुनौती के बावजूद, कंपनी ने घरेलू बाजार में बिक्री के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, रघुपति सिंघानिया ने बताया कि बाजार के विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत मांग बनी रही। आंकड़ों के अनुसार, तिमाही में घरेलू बिक्री की मात्रा में 25 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। इसमें रिप्लेसमेंट टायर की बिक्री 12 प्रतिशत और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) यानी सीधे वाहन निर्माताओं को होने वाली बिक्री 42 प्रतिशत बढ़ी।
सिंघानिया ने कहा, "पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे माल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई, जिससे सकल मार्जिन और परिचालन मार्जिन पर काफी असर पड़ा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टायर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का लगभग 70 प्रतिशत पेट्रोलियम आधारित होता है, जिसके कारण यह क्षेत्र कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील है।
इनपुट: IANS



