बांग्लादेश में खसरे का कहर: एक रिपोर्ट ने बताई प्रशासनिक चूकों और टीकाकरण की विफलता की कहानी
बांग्लादेश इस समय खसरे के एक बड़े प्रकोप से जूझ रहा है, जिसे एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वकालत समूह ने देश के हालिया इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है। कनाडा स्थित 'ग्लोबल…
बांग्लादेश इस समय खसरे के एक बड़े प्रकोप से जूझ रहा है, जिसे एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वकालत समूह ने देश के हालिया इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है। कनाडा स्थित 'ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस' (जीसीडीजी) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट टाला जा सकता था क्योंकि खसरा एक टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। एजेंसी IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, यह प्रकोप अचानक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और स्वास्थ्य प्रणाली की कई विफलताओं का नतीजा है।
जीसीडीजी ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप' में कहा है कि इस संकट की जड़ें 2024-2025 में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान पड़ी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में गंभीर बाधाएं आईं।
टीकाकरण कवरेज में भारी गिरावट
रिपोर्ट में बांग्लादेशी दैनिक 'समकाल' में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2025 में खसरे के टीकाकरण का कवरेज गिरकर महज 56.2 प्रतिशत रह गया था। यह 2017 से 2025 के बीच का सबसे निचला स्तर था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी बाद में इस बात की पुष्टि की कि 2024-2025 के दौरान खसरा-रूबेला (एमआर) टीके का देशव्यापी स्टॉक खत्म होना और नियमित टीकाकरण में कमी बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट का मुख्य कारण बनी, जिसके चलते 2026 में यह प्रकोप फैला।
सरकारी नीतियों में बदलाव और चेतावनी की अनदेखी
जीसीडीजी के अनुसार, बांग्लादेश पहले यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से डब्ल्यूएचओ-अनुमोदित टीके खरीदता था। लेकिन अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा प्रक्रिया अपना ली। रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से कहा गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच पांच से छह औपचारिक पत्रों और लगभग 10 बैठकों में अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित कमी के बारे में चेतावनी दी थी। रिपोर्ट में कहा गया, "फंड आवंटित होने के बावजूद खरीद की विधि को लेकर अनिर्णय और लंबी खुली निविदा प्रक्रिया के कारण समय पर टीके नहीं खरीदे जा सके।"
कई स्तरों पर विफलता
जीसीडीजी की रिपोर्ट में इस संकट के लिए कई कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें अंतरिम सरकार के दौरान कार्यक्रम में आई शिथिलता, टीका खरीद और आपूर्ति में बाधा, टीकों का स्टॉक खत्म होना, नियमित टीकाकरण सत्रों का रद्द होना, और तय टीकाकरण से चूकने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या शामिल है।
रिपोर्ट में इस साल सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की मौजूदा सरकार की प्रतिक्रिया को भी अपर्याप्त और अक्षम बताया गया है। जीसीडीजी ने कहा कि "ज्ञात और मापने योग्य जोखिमों" पर सरकार तेजी से प्रतिक्रिया देने में विफल रही। साथ ही, प्रकोप के दौरान चिकित्सा प्रतिक्रिया में "सूचना की अपारदर्शिता" की भी आलोचना की गई, जिसे एक अलग और गंभीर विफलता करार दिया गया।
इनपुट: IANS



