शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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सरकारी दस्तावेज़ के भेष में WhatsApp हैकिंग: 10,000 से ज़्यादा भारतीय बचाए गए, सरकार ने बताया कैसे बचें

भारत में WhatsApp अकाउंट हैक करने वाले एक बड़े मैलवेयर हमले को सरकार ने नाकाम कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि भारतीय साइबर अपराध…

सरकारी दस्तावेज़ के भेष में WhatsApp हैकिंग: 10,000 से ज़्यादा भारतीय बचाए गए, सरकार ने बताया कैसे बचें
(फोटो: IANS)

भारत में WhatsApp अकाउंट हैक करने वाले एक बड़े मैलवेयर हमले को सरकार ने नाकाम कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की समन्वित कार्रवाई से 10,000 से ज़्यादा भारतीयों को इस साइबर हमले का शिकार होने से बचाया गया है।

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गृह मंत्रालय (MHA) के मुताबिक, हाल के दिनों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर WhatsApp अकाउंट पर कब्ज़े (टेकओवर) से जुड़ी शिकायतों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

कैसे काम करता है यह मैलवेयर?

साइबर अपराधी आमतौर पर WhatsApp, SMS या ईमेल के ज़रिए एक संपीड़ित यानी ज़िप (.zip) फ़ाइल भेजते हैं। इन फ़ाइलों के नाम ऐसे रखे जाते हैं, जिससे वे किसी आधिकारिक दस्तावेज़ की तरह लगें, जैसे "स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट.जिप", "आरबीआई.जिप" या "एमसीए.जिप"। कई बार विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए फ़ाइल के नाम के आगे तारीख़ भी लिख दी जाती है। संदेश इस तरह से लिखा होता है कि यूज़र को लगता है कि यह कोई ज़रूरी बैंक स्टेटमेंट या सरकारी सूचना है और वह उसे खोल लेता है।

मंत्रालय ने समझाया कि जैसे ही कोई व्यक्ति अपने विंडोज डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इस ज़िप फ़ाइल को खोलता है, उसके सिस्टम में एक ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है। यह मैलवेयर डिवाइस को हैक करके यूज़र के चल रहे WhatsApp वेब सेशन को हाईजैक कर लेता है। कई मामलों में, धोखेबाज़ आयकर विभाग के नाम से फर्जी ई-मेल भी भेजते हैं।

संक्रमण की चेन और सरकारी कार्रवाई

एक बार अकाउंट हैक हो जाने के बाद, अपराधी पीड़ित के सभी संपर्कों और ग्रुप्स में वही संक्रमित फ़ाइल भेजकर हमले को और फैलाते हैं। सरकार के अनुसार, यह तरीका कॉर्पोरेट नेटवर्क के लिए भी एक बड़ा सुरक्षा ख़तरा बन सकता है।

इस खतरे से निपटने के लिए, गृह मंत्रालय ने 'सहयोग' पोर्टल के माध्यम से मैलवेयर से जुड़े कमांड एंड कंट्रोल (C2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक कर दिया, जिससे हमले का प्रभाव रुक गया। दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों में इस तरह की घटनाएं सामने आई थीं। I4C ने इससे पहले 22 जून को भी एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को सतर्क किया था।

नागरिकों के लिए सलाह

गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध ज़िप फ़ाइल को डाउनलोड या न खोलें। अगर बैंक, आरबीआई, एमसीए या किसी अन्य सरकारी संस्था के नाम से कोई संदेश आता है, तो उसकी सच्चाई आधिकारिक स्रोतों से ज़रूर जाँच लें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में, तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

इनपुट: IANS

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