गगनयान मिशन: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष अभियान की तैयारी पूरी, जानें कब उड़ान भरेगा 'व्योममित्र'
भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' को साकार करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगा चुका है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि मिशन के लिए ज़रूरी लॉन्च व्हीकल के…
भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' को साकार करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगा चुका है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि मिशन के लिए ज़रूरी लॉन्च व्हीकल के सभी propulsion (प्रणोदन) चरणों और संरचनाओं की ग्राउंड टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष में अपने नागरिक भेजने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल होने के एक कदम और करीब ले आई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सफल होने पर भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। सरकार की योजना सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि 2035 तक अपना खुद का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) स्थापित करने का भी लक्ष्य है। इसरो ने इसके लिए 5 मॉड्यूल वाली संरचना भी तैयार कर ली है।
मिशन की समय-सीमा और चरण
केंद्रीय मंत्री ने गगनयान कार्यक्रम के भविष्य की रूपरेखा भी साझा की। इसके तहत, 2026 की चौथी तिमाही में पहला मानवरहित प्रायोगिक मिशन लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में 'व्योममित्र' नामक एक अर्ध-मानव रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा ताकि इंसानी उड़ान से पहले सभी नई तकनीकों का परीक्षण और सत्यापन किया जा सके।
इस पहली उड़ान के बाद 2027 तक दो और मानवरहित मिशन संचालित होंगे, जो पूरी तरह से पहले मानवयुक्त मिशन की तरह ही होंगे। इन तीनों परीक्षणों के सफल रहने के बाद ही भारत का पहला मानवयुक्त कक्षीय अंतरिक्ष मिशन शुरू किया जाएगा।
तकनीकी तैयारी और सुरक्षा
मिशन की सफलता के लिए कई महत्वपूर्ण प्रणालियों का विकास और परीक्षण पूरा हो चुका है। मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (एचएलवीएम3) के क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल का प्रोपल्शन सिस्टम प्रमाणित हो चुका है। इसके अलावा, पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS), थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम, और एवियोनिक्स प्रणाली जैसे अहम हिस्से भी तैयार हैं।
अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के लिए ज़रूरी सभी पाँच तरह की मोटरों का विकास और सफल स्टैटिक परीक्षण भी कर लिया गया है। अंतरिक्ष विभाग के बयान के मुताबिक, मिशन के लिए ऑर्बिटल मॉड्यूल प्रिपरेशन फैसिलिटी और गगनयान कंट्रोल सेंटर जैसा आवश्यक बुनियादी ढाँचा भी तैयार है।
इनपुट: IANS



