तेजस मार्क 1A विमानों की डिलीवरी में देरी, लेकिन वायुसेना के पायलट पूरी तरह तैयार
भारतीय वायुसेना (IAF) अपने लड़ाकू बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत तेजस मार्क 1A विमानों का इंतजार कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन उन्नत विमानों की…
भारतीय वायुसेना (IAF) अपने लड़ाकू बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत तेजस मार्क 1A विमानों का इंतजार कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन उन्नत विमानों की डिलीवरी में पहले से ही देरी हो चुकी है, लेकिन भारतीय वायुसेना ने अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी है। विमानों को उड़ाने वाले पायलटों के पहले बैच का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।
रक्षा अधिकारियों ने बताया कि पायलटों को फिलहाल वायुसेना के पास पहले से मौजूद तेजस मार्क 1 विमानों पर ही प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह ट्रेनिंग एक सतत और सुचारू प्रक्रिया का हिस्सा है। भारतीय वायुसेना के पास तेजस मार्क 1 के दो स्क्वाड्रन पहले से ही मौजूद हैं, जो सुलूर और नाल एयरबेस पर तैनात हैं। इन्हीं बेसों पर पायलटों को वास्तविक उड़ान के साथ-साथ सिम्युलेटर पर भी ट्रेनिंग दी जा रही है।
मिग-21 की जगह लेगा तेजस
तेजस मार्क 1A विमानों से जो पहला स्क्वाड्रन बनेगा, वह मिग-21 बाइसन के आखिरी दो स्क्वाड्रनों में से एक की जगह लेगा, जिन्हें पिछले साल सेवा से हटाया गया था। विशेष रूप से, मिग-21 बाइसन का नंबर 3 स्क्वाड्रन 'कोबरा' ही नए तेजस विमानों को प्राप्त करेगा। इस स्क्वाड्रन का एक रोचक इतिहास रहा है, क्योंकि जब मिग-21 बिस को बाइसन में अपग्रेड किया गया था, तब भी पहला अपग्रेड इसी स्क्वाड्रन को मिला था।
उल्लेखनीय है कि 26 सितंबर 2025 को मिग-21 विमान 60 साल की शानदार सेवा के बाद भारतीय वायुसेना से रिटायर हो गया था। मिग-21 की आखिरी स्क्वाड्रन 'पैंथर्स' (नंबर 23) के पायलट, जिनमें स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा भी शामिल थीं, अब जल्द ही स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस मार्क 1A उड़ाते नजर आएंगे।
पायलटों का संक्रमण और प्रशिक्षण
अधिकारियों के अनुसार, यह संभव है कि भविष्य में तेजस मार्क 1A विमानों की कमान उन्हीं अधिकारियों को सौंपी जाए जो वर्तमान में तेजस मार्क 1 उड़ा रहे हैं। मार्क 1A संस्करण तकनीकी रूप से पुराने वर्जन से थोड़ा अलग है, इसलिए मौजूदा पायलट एक संक्षिप्त सिलेबस पूरा करने के बाद इसे आसानी से उड़ा सकते हैं। मिग-21 के पायलटों को भी दूसरे लड़ाकू विमानों पर स्विच करने के लिए 3 से 6 महीने के प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है, क्योंकि हर विमान की तकनीक अलग होती है।
इनपुट: IANS



