शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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ई-कोर्ट्स परियोजना: भारतीय न्याय व्यवस्था में डिजिटल क्रांति, मामलों की फाइलिंग और निपटारे में तीन गुना तेज़ी

भारत की न्याय व्यवस्था एक बड़े डिजिटल बदलाव के दौर से गुज़र रही है, जिसका श्रेय ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना को जाता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना ने न केवल अदालती कामकाज…

ई-कोर्ट्स परियोजना: भारतीय न्याय व्यवस्था में डिजिटल क्रांति, मामलों की फाइलिंग और निपटारे में तीन गुना तेज़ी
(फोटो: IANS)

भारत की न्याय व्यवस्था एक बड़े डिजिटल बदलाव के दौर से गुज़र रही है, जिसका श्रेय ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना को जाता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना ने न केवल अदालती कामकाज को कागज़-रहित बनाया है, बल्कि 2014 के बाद से नए मामले दर्ज करने और पुराने मामलों को निपटाने की रफ़्तार में लगभग तीन गुनी वृद्धि की है। शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी एक फैक्टशीट में बताया गया कि अब अदालतें हर साल दर्ज होने वाले मामलों से ज़्यादा मामलों का निपटारा कर रही हैं।

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इस मिशन ने एक अरब से ज़्यादा लोगों की सेवा करने वाली न्यायपालिका को आधुनिक बनाया है, जो लंबे समय से पारंपरिक कागज़ी कार्यवाही पर निर्भर थी। पहले लोगों को अपने मामलों के लिए अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होता था, और न्याय मिलने में भी देरी होती थी। ई-कोर्ट्स परियोजना ने तकनीक का इस्तेमाल कर इस प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और सुलभ बना दिया है।

डिजिटल बदलाव के तीन चरण

ई-कोर्ट्स परियोजना को तीन चरणों में लागू किया गया है। पहले चरण (2011-2015) में 14,000 से ज़्यादा अदालतों का कम्प्यूटरीकरण करके इसकी नींव रखी गई। दूसरे चरण (2015-2023) में नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, ई-फाइलिंग और ई-सेवा केंद्र जैसी नागरिक-केंद्रित सेवाएँ शुरू की गईं। इसी चरण में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बुनियादी ढाँचे में पाँच गुना से ज़्यादा का विस्तार हुआ।

अब यह परियोजना अपने तीसरे चरण (2023-2027) में है, जिसका लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाकर अदालतों को पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस बनाना है।

ई-फाइलिंग और ऑनलाइन भुगतान से सुविधा

अब वकीलों और नागरिकों को दस्तावेज़ जमा करने के लिए अदालत जाने की ज़रूरत नहीं है। ई-फाइलिंग सिस्टम के ज़रिए वे कहीं से भी ऑनलाइन केस फाइल कर सकते हैं। यह प्रणाली क्षेत्रीय भाषाओं को भी सपोर्ट करती है। फैक्टशीट के मुताबिक, 30 जून 2026 तक इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए 1.25 करोड़ से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए। वहीं, ई-पेमेंट सिस्टम से अदालती फीस के रूप में 1,404 करोड़ रुपए और जुर्माने के तौर पर 75 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है।

वर्चुअल सुनवाई और रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण

इस मिशन के तहत पुराने अदालती रिकॉर्ड के 753 करोड़ से ज़्यादा पन्नों को डिजिटाइज़ किया गया है, जिससे उन्हें सुरक्षित रखने और खोजने में आसानी हुई है। साथ ही, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अब गवाह और मुकदमेबाज़ दूर से ही सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। देश भर की अदालतों ने 4.18 करोड़ से ज़्यादा मामलों की सुनवाई वर्चुअल तरीके से की है। इसके अलावा, 11 उच्च न्यायालयों में अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग भी शुरू हो चुकी है। ट्रैफिक चालान के ऑनलाइन निपटारे के लिए 31 वर्चुअल कोर्ट भी बनाए गए हैं, जिन्हें 1,135.79 करोड़ रुपए की कुल राशि के 11.33 करोड़ चालान मिले हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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