शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

गोबरधन योजना: कैसे जैविक कचरा बदलेगा भारत की ऊर्जा तस्वीर, बचेंगे ₹40,000 करोड़

केंद्र सरकार की नई 'गोबरधन' योजना देश की ऊर्जा निर्भरता कम करने और अर्थव्यवस्था को गति देने की एक महत्वाकांक्षी पहल के रूप में सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के…

गोबरधन योजना: कैसे जैविक कचरा बदलेगा भारत की ऊर्जा तस्वीर, बचेंगे ₹40,000 करोड़
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार की नई 'गोबरधन' योजना देश की ऊर्जा निर्भरता कम करने और अर्थव्यवस्था को गति देने की एक महत्वाकांक्षी पहल के रूप में सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के माध्यम से भारत अपने आयात बिल में सालाना 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचा सकता है, जो देश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 23,731 करोड़ रुपये के कुल बजट वाली 'गोबरधन' (राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना) को मंजूरी दी। यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी, जिसका लक्ष्य जैविक कचरे को कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) में बदलकर इसे भारत के ऊर्जा मिश्रण का एक प्रमुख हिस्सा बनाना है।

अर्थव्यवस्था और रोज़गार पर असर

सरकारी अनुमानों के मुताबिक, यह योजना सिर्फ़ ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई आर्थिक लाभ भी हैं। गोबरधन योजना राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देगी और लगभग 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। ये रोज़गार कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, प्लांट संचालन और जैविक खाद के उत्पादन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगे, जिससे एक चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा मिलेगा।

निवेश और उत्पादन का लक्ष्य

इस योजना का उद्देश्य अगले दस वर्षों में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है। सरकार निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन दे रही है, जिसमें परियोजनाओं को प्रति टन प्रतिदिन क्षमता पर 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता और एमएसएमई इकाइयों को 85 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी का लाभ शामिल है। साथ ही, उत्पादकों को बाज़ार की निश्चितता देने के लिए गैस खरीद की गारंटी भी दी जाएगी, जिसके लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासित कीमत तय की गई है।

पर्यावरण और कृषि के लिए लाभ

यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इससे लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन (10 मिलियन टन) जीवाश्म ईंधन का उपयोग कम होगा और जैविक कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका जा सकेगा। इसके परिणामस्वरूप, 40 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। इसके अलावा, योजना के तहत लगभग 250 मिलियन मीट्रिक टन जैविक उर्वरक का उत्पादन होगा, जो कृषि क्षेत्र के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

पंजीकरण और वर्तमान स्थिति

भारत में सीबीजी या बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित करने या संचालित करने वाली किसी भी इकाई के लिए गोबरधन यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश भर में 1,908 सीबीजी/बायो-सीएनजी संयंत्र पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से 217 संयंत्र चालू हो गए हैं और 339 निर्माणाधीन हैं।

इनपुट: IANS

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