सोमवार, 3 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत में डेटा सेंटर: कैसे बदल जाएगी रोज़गार और रियल एस्टेट की तस्वीर?

भारत में डिजिटल क्रांति का अगला बड़ा अध्याय डेटा सेंटरों के विस्तार से लिखा जा रहा है। ये सिर्फ़ डेटा सहेजने के केंद्र नहीं, बल्कि रोज़गार और शहरी विकास के नए इंजन बनने की राह पर हैं। रियल एस्टेट…

भारत में डेटा सेंटर: कैसे बदल जाएगी रोज़गार और रियल एस्टेट की तस्वीर?
(फोटो: IANS)

भारत में डिजिटल क्रांति का अगला बड़ा अध्याय डेटा सेंटरों के विस्तार से लिखा जा रहा है। ये सिर्फ़ डेटा सहेजने के केंद्र नहीं, बल्कि रोज़गार और शहरी विकास के नए इंजन बनने की राह पर हैं। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म स्क्वायर यार्ड्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक देश की डेटा सेंटर परियोजनाएं 4.33 लाख से ज़्यादा नौकरियां पैदा कर सकती हैं।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत दुनिया का लगभग 20% डिजिटल डेटा पैदा करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में हमारी हिस्सेदारी महज़ 4% है। इसी बड़े अंतर को पाटने के लिए देश में करीब 9,030 मेगावाट क्षमता की नई डेटा सेंटर परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जो आर्थिक विकास को नई गति देंगी।

रोज़गार और रियल एस्टेट पर सीधा असर

रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 4.33 लाख रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। नौकरियों के इस उछाल से आवासीय संपत्तियों की मांग में भी भारी इज़ाफ़ा होगा। अनुमान के मुताबिक, लगभग 19.5 करोड़ वर्गफुट अतिरिक्त आवासीय जगह की ज़रूरत पड़ेगी।

स्क्वायर यार्ड्स के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी विवेक अग्रवाल ने कहा, "पिछले कई दशकों में भारत के रियल एस्टेट विकास को राजमार्गों, औद्योगिक गलियारों, हवाई अड्डों और सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों ने गति दी है। अब डेटा सेंटर इस विकास यात्रा का अगला महत्वपूर्ण चरण बनने जा रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि बिजली, फाइबर और लॉजिस्टिक्स में निवेश से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जिसका असर इन डिजिटल गलियारों के आसपास आवासीय और व्यावसायिक विकास के रूप में दिखता है।

कैसे बनते हैं ये नए आर्थिक केंद्र?

विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा सेंटर अपने आसपास एक पूरा इकोसिस्टम विकसित करते हैं। इनमें बेहतर बिजली सप्लाई, फाइबर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में ऐसे इलाकों को 'गोल्डन रिंग' कहा गया है, जो बड़े डेटा सेंटर परिसरों के 5 से 15 किलोमीटर के दायरे में होते हैं। इन क्षेत्रों में सड़कें, आवासीय टाउनशिप, बाज़ार और अन्य नागरिक सुविधाओं का तेज़ी से विकास होने की संभावना है।

राज्यों को कितना मिलेगा फायदा?

इस विकास का सबसे ज़्यादा लाभ महाराष्ट्र को मिलने का अनुमान है, जहां 5.4 करोड़ वर्गफुट से अधिक की आवासीय मांग पैदा हो सकती है। इसके बाद कर्नाटक (2.8 करोड़ वर्गफुट), आंध्र प्रदेश (2.3 करोड़ वर्गफुट), उत्तर प्रदेश (2.27 करोड़ वर्गफुट), तेलंगाना (2.16 करोड़ वर्गफुट) और तमिलनाडु (1.94 करोड़ वर्गफुट) का स्थान आता है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों की वजह से डेटा सेंटर में निवेश लगातार बढ़ रहा है।

इनपुट: IANS

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