मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत में डिजिटल पेमेंट की लहर के बावजूद कैश का चलन क्यों बढ़ रहा है? RBI ने बताई वजह

भारत में पिछले दशक में डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह कम नहीं हुआ है, बल्कि इसमें दोहरे अंकों की वृद्धि देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक…

भारत में डिजिटल पेमेंट की लहर के बावजूद कैश का चलन क्यों बढ़ रहा है? RBI ने बताई वजह
(फोटो: IANS)

भारत में पिछले दशक में डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह कम नहीं हुआ है, बल्कि इसमें दोहरे अंकों की वृद्धि देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मु के अनुसार, इस विरोधाभासी स्थिति के कारण भविष्य में मुद्रा की मांग का अनुमान लगाना और उसकी आपूर्ति की योजना बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्मु ने यह बात 13 अगस्त को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कही।

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डिप्टी गवर्नर ने बताया कि व्यक्तिगत लेनदेन में भले ही कैश की हिस्सेदारी घटी हो, लेकिन चलन में मौजूद कुल मुद्रा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है और साफ-सुथरे नोटों, सुरक्षित लॉजिस्टिक्स और ऐसे मुद्रा तंत्र के जरिए नकदी में लोगों का भरोसा बनाए रखना...मौद्रिक संप्रभुता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।"

भारत में कैश का विशाल पैमाना

शिरीष चंद्र मुर्मु ने आंकड़ों के माध्यम से भारत में नकदी के प्रबंधन की विशालता को समझाया। वर्तमान में भारत में 176 अरब बैंक नोट चलन में हैं, जबकि पिछले साल के अंत तक अमेरिका में लगभग 56 अरब डॉलर के नोट और यूरोजोन में 30 अरब यूरो के बैंक नोट ही सर्कुलेशन में थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के आंकड़ों में कम मूल्य वाले नोटों की संख्या अधिक है, जिसका मतलब है कि समान मूल्य के लेनदेन के लिए ज्यादा नोटों का इस्तेमाल होता है।

RBI पिछले कुछ वर्षों से हर साल छह अलग-अलग मूल्यवर्गों में 28 से 30 अरब नए बैंक नोटों का उत्पादन कर रहा है और लगभग 21 अरब पुराने नोटों को चलन से बाहर कर रहा है।

भविष्य की योजना और पर्यावरण

मुद्रा प्रबंधन की चुनौतियों को देखते हुए RBI अब नोटों की उम्र बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर रहा है। इसमें नोटों पर खास तरह की कोटिंग करना और कम मूल्य वाले नोटों के लिए पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल शामिल हो सकता है। इसके अलावा, नियामक कैश सप्लाई चेन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने पर भी काम कर रहा है। इसके लिए वितरण नेटवर्क को और बेहतर बनाने तथा पुराने नोटों के निपटान की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

इनपुट: IANS

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