मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय बीमा उद्योग: FY26 में 9% की बढ़त, पर मुनाफे में आई 23% की गिरावट

भारत के सामान्य बीमा (General Insurance) उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने आकार में 9% की बढ़ोतरी दर्ज की है। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) द्वारा मंगलवार को जारी एक…

भारतीय बीमा उद्योग: FY26 में 9% की बढ़त, पर मुनाफे में आई 23% की गिरावट
(फोटो: IANS)

भारत के सामान्य बीमा (General Insurance) उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने आकार में 9% की बढ़ोतरी दर्ज की है। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) द्वारा मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि के साथ उद्योग की कुल सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय (GDPI) 3.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वृद्धि का नेतृत्व निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों, खासकर स्वास्थ्य बीमा सेगमेंट ने किया। निजी कंपनियों ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए 10% की जीडीपीआई वृद्धि दर हासिल की, जबकि सरकारी कंपनियों की वृद्धि 8% पर रही। कुल सकल लिखित प्रीमियम (GWP) भी 10% बढ़कर 3.44 लाख करोड़ रुपये हो गया।

स्वास्थ्य और मोटर बीमा ने दी रफ्तार

क्षेत्रवार विश्लेषण से पता चलता है कि स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) इस वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन रहा। जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के बाद इस सेगमेंट में पूरे साल 17% की प्रभावशाली वृद्धि देखी गई, जो साल की पहली छमाही में केवल 10% थी। इसके अलावा, मोटर बीमा क्षेत्र भी लगभग 9% की दर से बढ़ा। हालांकि, वाहनों की बिक्री में 10.4% की बढ़ोतरी के बावजूद, नवीनीकरण-आधारित पोर्टफोलियो के कारण बीमा कंपनियां इसका पूरा फायदा नहीं उठा सकीं।

मुनाफे पर दबाव, बदला कंपनियों का फोकस

बढ़ते कारोबार के बावजूद, बीमा उद्योग के मुनाफे में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग का कर पश्चात लाभ (PAT) 23% घटकर 10,000 करोड़ रुपये रह गया। इसी तरह, इक्विटी पर रिटर्न (ROE) भी 9% से घटकर 6% पर आ गया। इसका एक बड़ा कारण कंपनियों द्वारा अपनी मूल्य-निर्धारण और पोर्टफोलियो रणनीतियों में किया गया बदलाव है, जिससे उद्योग का संयुक्त अनुपात (Combined Ratio) 2 अंक बढ़कर 113% हो गया।

बीसीजी में प्रबंध निदेशक और भारत बीमा प्रमुख पल्लवी मलानी ने कहा, "भारतीय सामान्य बीमा उद्योग लगातार बढ़ रहा है और अब यह अधिक परिपक्व चरण में प्रवेश कर रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में असली प्रतिस्पर्धा इस बात को लेकर होगी कि कौन सी बीमा कंपनी अपने बड़े कारोबार को लाभदायक और अनुशासित अंडरराइटिंग में बदल पाती है।

निजी कंपनियों का अनुशासित प्रदर्शन

रिपोर्ट यह भी बताती है कि अग्नि और फसल बीमा जैसे क्षेत्रों में वृद्धि धीमी रही। कंपनियों ने वाणिज्यिक पॉलिसियों के नवीनीकरण में मूल्य निर्धारण को लेकर अनुशासन बनाए रखा। इससे संकेत मिलता है कि अब उद्योग केवल कारोबार का आकार बढ़ाने के बजाय स्थायी और लाभदायक विकास को प्राथमिकता दे रहा है। विशेष रूप से, बड़ी निजी बीमा कंपनियों ने 7% प्रीमियम वृद्धि के साथ अपने हानि और संयुक्त अनुपात में 2 से 3 अंकों का सुधार किया, और उनका आरओई 14% से बढ़कर 15% हो गया।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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