मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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Tata Sons की सालाना बैठक पहली बार टली, कोरम की कमी बनी वजह

भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक, टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) को कंपनी के इतिहास में पहली बार स्थगित करना पड़ा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को प्रस्तावित यह…

Tata Sons की सालाना बैठक पहली बार टली, कोरम की कमी बनी वजह
(फोटो: IANS)

भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक, टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) को कंपनी के इतिहास में पहली बार स्थगित करना पड़ा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को प्रस्तावित यह बैठक कोरम पूरा न होने के कारण नहीं हो सकी। किसी भी बैठक में फैसले लेने के लिए सदस्यों की न्यूनतम ज़रूरी संख्या को कोरम कहा जाता है।

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रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह स्थिति सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) से जुड़ी एक पाबंदी के कारण उत्पन्न हुई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब टाटा संस नेतृत्व परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुज़र रहा है।

नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया

मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 20 फरवरी, 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा इस पद पर न रहने का फैसला किया है। उनके इस निर्णय के बाद नए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है, जिसकी ज़िम्मेदारी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने संभाली है।

इस पूरी प्रक्रिया पर सबकी नज़रें रहेंगी क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स की सामूहिक रूप से टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो उन्हें बेहद प्रभावशाली बनाती है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के तौर पर नोएल टाटा अगले चेयरमैन के चयन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, अंतिम नियुक्ति टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' में निर्धारित औपचारिक समिति प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाएगी।

पृष्ठभूमि और नोएल टाटा की भूमिका

नेतृत्व परिवर्तन की यह चर्चा मई में हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक के बाद तेज़ हुई। उस बैठक में चंद्रशेखरन ने समूह के नए व्यवसायों, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और एविएशन, के प्रदर्शन और पूंजी की ज़रूरतों पर एक प्रस्तुति दी थी। बातचीत के दौरान नोएल टाटा ने कुछ व्यवसायों में हो रहे नुकसान पर चिंता जताई थी।

दिलचस्प बात यह है कि नोएल टाटा खुद भी समूह की कई कंपनियों में बदलाव के दौर से गुज़र रहे हैं। गैर-कार्यकारी निदेशकों के लिए सेवानिवृत्ति के नियमों के अनुसार, 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर वह इस साल नवंबर में टाटा की छह कंपनियों के बोर्ड से रिटायर हो जाएँगे।

इनपुट: IANS

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