मुक्त व्यापार समझौते भारतीय निर्यात को दे रहे नई उड़ान, UAE और ऑस्ट्रेलिया बने प्रमुख सहयोगी
भारत के निर्यात क्षेत्र में एक सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है, जिसका श्रेय हाल के वर्षों में किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements - FTAs) को दिया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की…
भारत के निर्यात क्षेत्र में एक सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है, जिसका श्रेय हाल के वर्षों में किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements - FTAs) को दिया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा जारी एक फैक्टशीट से पता चलता है कि इन समझौतों की बदौलत भारतीय उत्पादों की पहुंच नए वैश्विक बाजारों तक बढ़ी है और निर्यातक देश शुल्क में मिलने वाली रियायतों का भरपूर लाभ उठा रहे हैं।
इन समझौतों का सबसे स्पष्ट असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार में दिखा है। UAE को होने वाला भारतीय निर्यात 37.35 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया को किया जाने वाला निर्यात 7.28 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। ये आंकड़े इन दोनों देशों के साथ 2022 में लागू हुए व्यापार समझौतों की शुरुआती सफलता को दर्शाते हैं।
समझौतों का कैसे मिल रहा है लाभ?
किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का वास्तविक फायदा तब होता है जब निर्यातक उसके तहत मिलने वाले लाभों का प्रभावी ढंग से उपयोग करें। इसके लिए उन्हें यह साबित करना होता है कि उनके उत्पाद समझौते में तय 'मूल नियमों' (Rules of Origin) का पालन करते हैं।
इसी प्रक्रिया के लिए 'वरीयता प्राप्त मूल प्रमाणपत्र' (Preferential Certificate of Origin - CoO) जारी किया जाता है। यह प्रमाणपत्र इस बात की पुष्टि करता है कि उत्पाद आयातक देश में कम या शून्य सीमा शुल्क का हकदार है। सरकार के मुताबिक, भारतीय निर्यातक इस सुविधा का लगातार अधिक उपयोग कर रहे हैं।
आंकड़ों में दिख रही सफलता
फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जिसमें 441.8 अरब डॉलर का माल निर्यात शामिल था। यह तेजी मौजूदा वित्त वर्ष में भी जारी है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान कुल निर्यात 232.73 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 11.37% अधिक है।
जारी किए गए मूल प्रमाणपत्रों की संख्या भी इस सफलता की कहानी कहती है। उदाहरण के लिए, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ हुए समझौते के अक्टूबर 2025 में लागू होने के बाद 7,885 CoO जारी किए गए। इसी तरह, ओमान के साथ जून 2026 में लागू हुए समझौते के तहत अब तक 783 CoO जारी हो चुके हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रमाणपत्रों की बढ़ती संख्या इस बात का सबूत है कि भारतीय कंपनियां FTAs से मिलने वाले अवसरों का प्रभावी ढंग से लाभ उठा रही हैं।
इनपुट: IANS



