मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाज़ार में गिरावट, सेंसेक्स 77,235 पर बंद, IT शेयरों ने बिगाड़ा सेंटिमेंट

मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में कारोबार का अंत गिरावट के साथ हुआ, जिसमें बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिकवाली का नेतृत्व मुख्य रूप से आईटी…

शेयर बाज़ार में गिरावट, सेंसेक्स 77,235 पर बंद, IT शेयरों ने बिगाड़ा सेंटिमेंट
(फोटो: IANS)

मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में कारोबार का अंत गिरावट के साथ हुआ, जिसमें बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिकवाली का नेतृत्व मुख्य रूप से आईटी शेयरों ने किया, जबकि कमज़ोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों की धारणा पर असर डाला।

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कारोबार खत्म होने पर बीएसई का सेंसेक्स 492.70 अंक, यानी 0.63% गिरकर 77,235.46 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 132.75 अंक या 0.55% की कमज़ोरी के साथ 24,154.90 पर आ गया।

किन सेक्टर्स में रही सबसे ज़्यादा बिकवाली?

इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका टेक्नोलॉजी शेयरों की रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.93% की गिरावट के साथ टॉप लूज़र रहा। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी (1.42%), निफ्टी पीएसयू बैंक (1.01%), निफ्टी एफएमसीजी (0.77%) और निफ्टी मेटल (0.61%) जैसे प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक भी दबाव में बंद हुए।

हालांकि, कुछ सेक्टर्स बढ़त बनाने में कामयाब रहे। इनमें निफ्टी इंडिया डिफेंस (1.29%), निफ्टी मीडिया (0.40%) और निफ्टी ऑटो (0.30%) शामिल थे, जो हरे निशान में बंद हुए।

मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल

लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप सेगमेंट में भी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 277.60 अंक (0.44%) फिसलकर 63,539.40 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट 19,808.85 के स्तर पर बंद हुआ, जो व्यापक बाज़ार में मिली-जुली प्रतिक्रिया का संकेत देता है।

बाज़ार में गिरावट के पीछे के कारण

बाज़ार जानकारों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक ज़िम्मेदार रहे। अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम खत्म होने से मध्य पूर्व में बढ़े तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी ने भी बाज़ार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यील्ड बढ़ने से उभरते बाज़ारों का आकर्षण कम हो जाता है, जिसका असर आईटी शेयरों पर सबसे ज़्यादा दिखा, क्योंकि उच्च ब्याज दरों से वैश्विक टेक्नोलॉजी खर्च घटने की आशंका है।

इनपुट: IANS

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