मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र: अब मुख्यमंत्री फडणवीस को मिला किसी भी मंत्री का फैसला पलटने का अधिकार, नए नियम लागू

महाराष्ट्र में अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को किसी भी कैबिनेट मंत्री के फैसले को बदलने या रद्द करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। यह अधिकार उन्हें 'महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस, 2026' के…

महाराष्ट्र: अब मुख्यमंत्री फडणवीस को मिला किसी भी मंत्री का फैसला पलटने का अधिकार, नए नियम लागू
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को किसी भी कैबिनेट मंत्री के फैसले को बदलने या रद्द करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। यह अधिकार उन्हें 'महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस, 2026' के तहत दिया गया है, जिसे सरकार ने अधिसूचित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम को राज्य में प्रशासनिक शक्तियों के एक बड़े केंद्रीकरण के रूप में देखा जा रहा है।

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नए नियमों के अनुसार, मुख्यमंत्री व्यापक जनहित में आवश्यक होने पर किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय में हस्तक्षेप कर सकते हैं। हालांकि, अर्ध-न्यायिक मामलों को इस अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी मंत्री के फैसले को पलटने के लिए मुख्यमंत्री को लिखित रूप में विस्तृत कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा।

नए नियमों की प्रमुख बातें

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 166(2) और 166(3) के तहत जारी किए गए इन नए नियमों ने पुराने सभी नियमों की जगह ले ली है। इनका उद्देश्य राज्य की निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाना है। नए नियमों में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

नियम 13(5) के तहत मुख्यमंत्री को यह विशेष अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री को किसी भी समय किसी भी विभाग से कोई भी फाइल या आधिकारिक दस्तावेज मंगवाने का भी अधिकार होगा, जिसका पालन करना संबंधित मंत्री और सचिव के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है। हालांकि, विभागों के नियमित प्रशासनिक कार्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रभारी मंत्री के पास ही बनी रहेगी।

वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था

नए नियम वित्तीय मामलों में भी सख्ती लाते हैं। नियम 17(2) और नियम 39 के अनुसार, कोई भी प्रशासनिक विभाग वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना राजस्व छोड़ने, भूमि अनुदान या रियायतें देने जैसे वित्तीय प्रभाव वाले आदेश जारी नहीं कर सकता। मुख्य सचिव को राज्य में सिविल सेवाओं के प्रमुख के रूप में स्थापित किया गया है, जिन्हें किसी भी ऐसे प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री को सूचित करने का अधिकार होगा जो नियमों या नीतियों का उल्लंघन करता हो।

गठबंधन की राजनीति पर संभावित असर

यह अधिसूचना 14 अगस्त, 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होते ही लागू हो गई है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री फडणवीस इस अधिकार का उपयोग सहयोगी दलों (एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार की एनसीपी) के मंत्रियों के फैसलों को पलटने के लिए करते हैं, तो सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर मतभेद पैदा हो सकते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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