कर चोरी की आशंका: विदेश भेजे गए पैसों की राष्ट्रव्यापी जांच में जुटी आयकर विभाग
देशभर में कुछ ऐसी कंपनियों और इकाइयों पर आयकर विभाग की नजर है, जिन्होंने पिछले तीन सालों में बहुत कम या शून्य कारोबार दिखाने के बावजूद बड़ी मात्रा में पैसा विदेश भेजा है। समाचार एजेंसी IANS की एक…
देशभर में कुछ ऐसी कंपनियों और इकाइयों पर आयकर विभाग की नजर है, जिन्होंने पिछले तीन सालों में बहुत कम या शून्य कारोबार दिखाने के बावजूद बड़ी मात्रा में पैसा विदेश भेजा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, आंकड़ों के विश्लेषण और जमीनी खुफिया जानकारी के आधार पर विभाग ने मंगलवार को ऐसे संदिग्ध विदेशी धन प्रेषण (Foreign Remittance) के मामलों में एक राष्ट्रव्यापी सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ये धन भेजने वाली कई इकाइयां या तो आयकर रिटर्न (ITR) भर ही नहीं रही थीं, या फिर बहुत मामूली कारोबार दिखाकर रिटर्न दाखिल कर रही थीं। उनके द्वारा विदेश भेजी गई भारी-भरकम रकम और उनके घोषित कारोबार के बीच कोई मेल नहीं था।
जांच के दायरे में कौन-कौन?
आयकर विभाग के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस अभियान के केंद्र में मुख्य रूप से मुखौटा कंपनियां (Shell Companies) और उनके पीछे काम करने वाले लोग हैं। साथ ही, उन पेशेवरों पर भी कार्रवाई की जा रही है, जिन्होंने फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र जारी किए थे। यह प्रमाणपत्र किसी अकाउंटेंट द्वारा यह सत्यापित करने के लिए जारी किया जाता है कि विदेश भेजी जा रही रकम पर टैक्स बनता है या नहीं।
इस देशव्यापी अभियान में कुल 394 इकाइयां और 36 पेशेवर शामिल हैं। इनमें से 117 इकाइयां देश की सीमाओं से लगे राज्यों के जिलों में स्थित हैं, जिन्होंने बड़ी मात्रा में पैसा विदेशों में भेजा है।
कैसे हुआ इस नेटवर्क का खुलासा?
विभाग को इस राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का सुराग फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के एक समूह पर की गई तलाशी के दौरान मिला। ये ट्रस्ट फर्जी दान के बदले में बोगस लेन-देन के लिए एंट्री मुहैया कराने का काम करते थे। जमीनी खुफिया जानकारी से यह भी पता चला कि ये इकाइयां अपने घोषित पतों पर मौजूद ही नहीं हैं।
विश्लेषण में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र कुछ गिने-चुने पेशेवरों ने ही जारी किए थे। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या इन अकाउंटेंट्स ने प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उचित जांच-पड़ताल की थी। विभाग ने पेशेवरों को ऐसे प्रमाणपत्र जारी करते समय विवेक और सावधानी बरतने के महत्व पर जोर दिया है। फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



