मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
देश

असम में वन्यजीव संरक्षण को बड़ी कामयाबी, संरक्षित वन क्षेत्र में जयपुर जितना हुआ इज़ाफ़ा

असम ने अपने वन्यजीव और वन संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य के संरक्षित वन क्षेत्र नेटवर्क में 403.62 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि की गई है, जो क्षेत्रफल के लिहाज़ से लगभग…

असम में वन्यजीव संरक्षण को बड़ी कामयाबी, संरक्षित वन क्षेत्र में जयपुर जितना हुआ इज़ाफ़ा
(फोटो: IANS)

असम ने अपने वन्यजीव और वन संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य के संरक्षित वन क्षेत्र नेटवर्क में 403.62 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि की गई है, जो क्षेत्रफल के लिहाज़ से लगभग जयपुर शहर के बराबर है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस विस्तार को संरक्षण परिदृश्य में एक अभूतपूर्व कदम बताया है।

विज्ञापन

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए कहा कि साल 2016 से अब तक हुई यह बढ़ोतरी असम में वन और वन्यजीव संरक्षण को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा क़दम है। उन्होंने कहा कि इससे असम भारत के संरक्षण मानचित्र का विस्तार कर रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस विस्तार से न केवल वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को बल मिलेगा, बल्कि विभिन्न संरक्षण क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क भी स्थापित हो सकेगा।

काज़ीरंगा को विशेष लाभ

इस विस्तार का सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव प्रसिद्ध काज़ीरंगा परिदृश्य पर पड़ने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नए क्षेत्रों के जुड़ने से काज़ीरंगा को एक ज़्यादा टिकाऊ और जुड़ा हुआ संरक्षण क्षेत्र बनाने में मदद मिली है। गौरतलब है कि काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडों की विश्व प्रसिद्ध आबादी के साथ-साथ हाथी, बाघ, जंगली भैंसों और कई प्रवासी पक्षियों का भी घर है।

राज्य की संरक्षण रणनीति

असम देश के सबसे समृद्ध जैव-विविधता वाले राज्यों में से एक है, जहाँ कई राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य हैं। राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित करने, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जंगलों पर बढ़ते मानवीय दबाव को कम करना और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है। इस ताज़ा विस्तार से राज्य के संरक्षण प्रयासों को और मज़बूती मिलने की संभावना है।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →