मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत में सेमीकंडक्टर और AI: हाई-टेक कंपनियों के लिए आसान होंगे BIS सर्टिफिकेशन नियम

भारत में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी हाई-टेक कंपनियों के लिए कारोबार करना और आसान हो सकता है। सरकार इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के…

भारत में सेमीकंडक्टर और AI: हाई-टेक कंपनियों के लिए आसान होंगे BIS सर्टिफिकेशन नियम
(फोटो: IANS)

भारत में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी हाई-टेक कंपनियों के लिए कारोबार करना और आसान हो सकता है। सरकार इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के प्रमाणन यानी सर्टिफिकेशन से जुड़े नियमों को सरल बनाने की तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसका मकसद देश में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने वाली कंपनियों की नियामकीय चुनौतियों को कम करना है।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में आयोजित एक गोलमेज बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई कंपनियों ने चिंता जताई थी कि हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी खास मशीनों, उपकरणों और पुर्जों को भारत लाने में सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया काफी जटिल है। इस वजह से नई फैक्ट्रियां स्थापित करने में अनावश्यक देरी होती है।

नियामकीय बाधाओं को दूर करने की तैयारी

पीयूष गोयल ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि सरकार इन चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और BIS को एक नया ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा, "हम भारत लौटने के बाद इस ढांचे पर काम करेंगे और सामूहिक छूट, उत्पाद-आधारित छूट, परियोजना-आधारित छूट या कंपनी स्तर पर छूट जैसे विकल्पों के जरिए समाधान तलाशेंगे।"

प्रस्तावित व्यवस्था में कई स्तरों पर छूट देने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें विशेष क्षेत्रों, खास कंपनियों या किसी विशेष उत्पाद या परियोजना के आधार पर राहत देना शामिल हो सकता है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को जरूरी सामान और सेवाएं समय पर मिलें और उनकी परियोजनाएं नियमों के कारण प्रभावित न हों।

निवेशकों को हरसंभव मदद का वादा

गोयल ने सेमीकंडक्टर और AI पर आयोजित इस बैठक में कहा कि सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता में रखा है। उन्होंने जापानी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, "हम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाना चाहते हैं।" उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें निवेशकों को हरसंभव सहयोग देंगी, जिसमें उपयुक्त स्थानीय साझेदारों और निवेशकों को खोजने में मदद करना भी शामिल है।

मंत्री ने भारत और जापान के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध नई प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण और सप्लाई चेन के विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े अवसर पैदा करते हैं। भारत फिलहाल एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने और वैश्विक तकनीकी कंपनियों को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

इनपुट: IANS

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