PM-कुसुम योजना: सौर ऊर्जा से कैसे घट रही खेती की लागत और बढ़ रही किसानों की आय?
किसानों की आय दोगुनी करने और खेती की लागत घटाने के सरकारी प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-कुसुम) योजना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समाचार एजेंसी IANS की…
किसानों की आय दोगुनी करने और खेती की लागत घटाने के सरकारी प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-कुसुम) योजना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर मिलने वाली सब्सिडी से किसानों को बिजली और डीजल के बढ़ते खर्च से बड़ी राहत मिल रही है। यह योजना न केवल खेती के लिए स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प दे रही है, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी खोल रही है।
पीएम-कुसुम योजना का मुख्य लक्ष्य किसानों को सिंचाई के लिए एक आत्मनिर्भर और सस्ता विकल्प देना है। इस स्कीम के तहत सोलर पंप लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को आर्थिक सहायता देती हैं। इसका सीधा फायदा यह है कि किसान बिजली कटौती या डीज़ल की महंगी कीमतों की चिंता किए बिना अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं।
किसानों को कैसे मिल रहा है दोहरा लाभ?
यह योजना सिर्फ़ सिंचाई तक सीमित नहीं है। किसान अपनी बंजर या खाली पड़ी ज़मीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली पैदा कर सकते हैं। इस अतिरिक्त बिजली को ग्रिड को बेचकर वे एक स्थायी आय का स्रोत भी बना सकते हैं। इस तरह, सोलर एनर्जी खेतों को पानी देने के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने का भी एक ज़रिया बन रही है।
लागत में कमी, मुनाफ़े में बढ़ोतरी: क्या कहते हैं किसान?
हांसी के गढ़ी गांव के किसान इस योजना के फायदों को खुद महसूस कर रहे हैं। लाभार्थी किसान नरेश बताते हैं कि पहले बिजली और डीज़ल पर उनका काफ़ी पैसा खर्च होता था। उन्होंने कहा, "सोलर पंप लगने के बाद उन्हें हर महीने करीब 400 से 500 रुपए की बचत हो रही है।"
एक अन्य किसान मुलायम सिंह ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि सोलर पंप लगने से उन्हें काफी फायदा मिल रहा है। उनके मुताबिक, पहले बिजली बिल और डीज़ल का खर्च उनकी बचत को कम कर देता था, लेकिन अब सौर ऊर्जा से सिंचाई करना कहीं ज़्यादा किफ़ायती हो गया है।
इसी तरह, किसान नरेंद्र ने बताया कि अब उन्हें सिंचाई के लिए बिजली आने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा, "धूप निकलते ही पंप चलने लगता है और शाम को सूरज ढलने के साथ अपने आप बंद हो जाता है।" इससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। किसानों का मानना है कि लंबे समय में यह व्यवस्था खेती को और भी ज़्यादा मुनाफ़े का सौदा बना सकती है।
इनपुट: IANS



