भारत में डिजिटल पेमेंट की क्रांति: चाय-सब्ज़ी से लेकर बड़े भुगतान तक, UPI ने कैसे बदली तस्वीर?
भारत में रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के मामले में आज दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, आज दुनिया में होने वाले हर दो रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन में से…
भारत में रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के मामले में आज दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, आज दुनिया में होने वाले हर दो रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन में से एक भारत में होता है। इस क्रांति के केंद्र में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) है, जिसने पिछले एक दशक में छोटे-बड़े सभी भुगतानों का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।
एक समय था जब चाय, किराना या सब्ज़ी जैसी छोटी-मोटी खरीदारी के लिए भी नकद और खुले पैसों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब मोबाइल फोन के ज़रिए चंद सेकंड में भुगतान करना आम बात हो गई है। यह बदलाव सिर्फ़ शहरी या बड़े कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कोने-कोने में छोटे दुकानदार और आम ग्राहक भी इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं।
आंकड़ों में UPI की ज़बरदस्त ग्रोथ
UPI की सफलता का अंदाज़ा इसके बढ़ते आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहाँ UPI के माध्यम से लगभग 2 करोड़ लेनदेन हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 24,000 करोड़ से ज़्यादा हो गई। इसी दौरान, UPI के ज़रिए हुए लेनदेन का कुल मूल्य 314 लाख करोड़ रुपए के विशाल आंकड़े तक पहुंच गया। अकेले जुलाई 2026 में ही UPI पर 2,360 करोड़ से ज़्यादा ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जो भारत में डिजिटल भुगतान की तीव्र गति को दर्शाता है।
दिलचस्प बात यह है कि देश के कुल डिजिटल भुगतान में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% है। इसमें से भी 86% मर्चेंट भुगतान 500 रुपए से कम के होते हैं, जो यह साबित करता है कि UPI अब रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
छोटे दुकानदारों के लिए वरदान
UPI ने छोटे दुकानदारों की कई बड़ी समस्याओं का समाधान किया है। पुष्प विहार के एक दुकानदार जयकिशन बताते हैं, “पहले खुदरा पैसे की समस्या बनी रहती थी, लेकिन अब ग्राहक डिजिटल माध्यम से पूरी रकम का भुगतान कर देते हैं। यूपीआई ने छोटे दुकानदारों की काफी मदद की है।”
एक अन्य दुकानदार का भी यही मानना है। उन्होंने कहा कि अब खुले पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ती और बैंक जाकर छोटी-छोटी रकम जमा करने की ज़रूरत भी कम हो गई है। ऑनलाइन भुगतान से तुरंत पता चल जाता है कि पैसा खाते में आ गया है या नहीं। हालांकि, उन्होंने कुछ सेवाओं पर लगने वाले चार्ज को थोड़ा नुकसानदेह बताया, लेकिन कुल मिलाकर इसे एक मददगार सुविधा माना।
दुकानदार मनोज कुमार भी UPI को बेहद उपयोगी बताते हुए कहते हैं, “यूपीआई काफी उपयोगी है। ग्राहकों को काफी सहूलियत है। खुदरे की समस्या से निजात मिली है। छोटी से छोटी पेमेंट अब यूपीआई से हो जाती है।” उन्होंने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पहल की भी सराहना की।
इनपुट: IANS



