मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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राम रहीम की पैरोल पर SGPC सदस्य का सवाल: बंदी सिखों की रिहाई क्यों नहीं?

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने देश में कानून के इस्तेमाल में…

राम रहीम की पैरोल पर SGPC सदस्य का सवाल: बंदी सिखों की रिहाई क्यों नहीं?
(फोटो: IANS)

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने देश में कानून के इस्तेमाल में दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ राम रहीम को लगातार राहत दी जा रही है, तो दूसरी तरफ दशकों से जेल में बंद सिख कैदियों की रिहाई पर सरकारें गंभीरता नहीं दिखा रहीं।

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समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में भाई मंजीत सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कानून की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जा रही है, जिसे वे पहले भी कई मंचों पर उठा चुके हैं। उन्होंने देश की आजादी में सिख समुदाय के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के बाद सिखों से किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं।

लंबित रिहाई और अधूरे वादे

भाई मंजीत सिंह ने उन सिख कैदियों की सूची गिनाई जो दशकों से जेल में हैं। उन्होंने जगतार सिंह हवारा, भाई बलवंत सिंह राजोआणा, प्रोफेसर देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर और गुरदीप सिंह खेड़ा का नाम लेते हुए कहा कि इनमें से कई अपनी उम्रकैद की सजा भी पूरी कर चुके हैं, फिर भी उनकी रिहाई नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से इन मामलों में मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

उन्होंने गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादे की भी याद दिलाई। उस समय बंदी सिखों की रिहाई और भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी को उम्रकैद में बदलने का आश्वासन दिया गया था, जो आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।

पैरोल के पीछे राजनीतिक हित?

डेरा प्रमुख को बार-बार मिल रही पैरोल पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने दावा किया कि राम रहीम को यह 17वीं बार पैरोल मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे राजनीतिक हित और चुनावी वोट बैंक की राजनीति हो सकती है। भाई मंजीत सिंह ने आशंका जताई कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान भी राम रहीम को सुरक्षा के बीच पंजाब लाया जा सकता है।

इस भेदभाव को उजागर करते हुए उन्होंने सवाल किया कि गंभीर रूप से बीमार अपनी मां से मिलने के लिए जगतार सिंह हवारा को पैरोल क्यों नहीं दी जा रही? उन्होंने मांग की कि देश में सभी नागरिकों के लिए कानून का समान रूप से इस्तेमाल होना चाहिए और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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