कपिल सिब्बल का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, CEC को निलंबित करने और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण रोकने की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिब्बल ने…
वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिब्बल ने सीईसी को तत्काल निलंबित करने और देशभर में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है।
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के तहत 30 राज्यों में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं और अगर यह जारी रही तो यह आंकड़ा 30 करोड़ तक पहुंच सकता है। सिब्बल ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को लगातार सुप्रीम कोर्ट के सामने उठा रहे हैं, लेकिन उनके अनुसार, अदालत उनकी बात नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा, "हमने ये बातें पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बता दी हैं। हम सुप्रीम कोर्ट को हर दिन बता रहे हैं। जब भी यह मामला सामने आता है, सुप्रीम कोर्ट हमारी बात सुनता तक नहीं है।"
फैसलों में मनमानी का आरोप
कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार अकेले ही सभी फैसले ले रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग एक तीन सदस्यीय निकाय है जिसमें फैसले बहुमत से लिए जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया, "चुनाव कैसे कराना है, ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) को क्या करना चाहिए, कौन सा फॉर्म भरना है, ये सब ज्ञानेश कुमार अकेले तय कर रहे हैं।" सिब्बल के अनुसार, दो अन्य चुनाव आयुक्तों, श्री जोशी और श्री संधू ने पिछले 10 महीनों में लगभग 14 बार इसका विरोध करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया 'संवैधानिक नहीं है, कानून के मुताबिक नहीं है', लेकिन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया।
एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल
सिब्बल ने देशभर में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की वैधता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के तहत एसआईआर केवल विशेष मामलों में ही की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले ऐसा सिर्फ एक बार और केवल एक ही चुनाव क्षेत्र में हुआ था। सिब्बल ने आरोप लगाया कि इसे पूरे देश में इसलिए लागू किया जा रहा है ताकि चुनाव को नियंत्रित किया जा सके और यह तय हो कि किसे वोट देने का अधिकार मिले और किसका नाम लिस्ट से हटाया जाए।
स्वतंत्र जांच की मांग
इसके अतिरिक्त, सिब्बल ने वोटर पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम कट गए हैं, उन्हें दोबारा पंजीकरण के लिए झूठा घोषणापत्र देना पड़ रहा है कि उन्होंने पहले कभी वोट नहीं दिया है। इन सभी आरोपों के आधार पर कपिल सिब्बल ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया की एक स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने तक सीईसी को निलंबित किया जाना चाहिए।
इनपुट: IANS



