भारत के साथ पनडुब्बी समझौते को जर्मनी की हरी झंडी, अब नई दिल्ली के फैसले का इंतजार
भारत और जर्मनी के बीच एक महत्वपूर्ण पनडुब्बी सौदे पर जर्मनी ने अपनी ओर से सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, और अब इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारत की मंजूरी का इंतजार है। समाचार एजेंसी IANS के…
भारत और जर्मनी के बीच एक महत्वपूर्ण पनडुब्बी सौदे पर जर्मनी ने अपनी ओर से सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, और अब इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारत की मंजूरी का इंतजार है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जानकारी भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर वीक ने बुधवार को एक बातचीत के दौरान दी।
डॉ. वीक ने बताया कि सौदे से जुड़े जरूरी दस्तावेजों को जर्मनी की तरफ से सहमति मिल चुकी है और अब भारत को अपनी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। उन्होंने कहा, "दस्तावेजों के मामले में, इसे अंतिम रूप दिया जा चुका है और जर्मनी ने इस पर सहमति दे दी है। अब भारत को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करना और समझौते को अंतिम रूप देना है।"
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर जर्मनी का रुख
भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग पर बात करने के अलावा, जर्मन राजदूत ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर भी टिप्पणी की। उन्होंने संघर्ष को रोकने की पूरी जिम्मेदारी रूस पर डालते हुए कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब चाहें, इस युद्ध को समाप्त कर सकते हैं।
उनके मुताबिक, यूक्रेन एक युद्धविराम समझौते के लिए तैयार है, लेकिन रूस इसके लिए सहमत नहीं हो रहा है। डॉ. वीक ने कहा, "सबसे पहले, इस युद्ध को रोकने की जिम्मेदारी पुतिन की है। वो इसे कल ही रोक सकते हैं। वह हमलावर हैं और सीजफायर समझौते की राह में बाधा बने हुए हैं।"
'रूस पर दबाव बढ़ाना जरूरी'
राजदूत ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को रूस पर आर्थिक दबाव बनाना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम सभी को रूस पर दबाव बनाना होगा। हमें प्रतिबंधों के जरिए लागत बढ़ाकर रूसी नेतृत्व के कॉस्ट-बेनिफिट उठाने के हिसाब-किताब को बदलना होगा।"
डॉ. वीक ने यह भी रेखांकित किया कि तेल निर्यात रूस के राजस्व का एक बड़ा स्रोत है, जिससे उसके सैन्य अभियानों को वित्तीय मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि रूस की तेल बेचकर कमाई करने की क्षमता को सीमित करने के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि उसके लिए युद्ध जारी रखना मुश्किल हो जाए।
इनपुट: IANS



