पीएम पैकेज कर्मचारियों को धमकी: कश्मीरी पंडित समिति ने कहा- 'सिर्फ भाईचारे की बातों से नहीं, ठोस कदमों से लौटेगा विश्वास'
कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को मिली एक कथित नई धमकी ने कश्मीरी पंडित समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। इस मामले पर कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति…
कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को मिली एक कथित नई धमकी ने कश्मीरी पंडित समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। इस मामले पर कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि केवल भाईचारे की बातें दोहराने से विश्वास बहाल नहीं होगा, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केपीएसएस अध्यक्ष संजय कुमार टिक्कू ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि बार-बार कश्मीरी पंडितों पर ही कश्मीर में भरोसा साबित करने का बोझ नहीं डाला जा सकता, जबकि यह समुदाय पहले ही हिंसा और विस्थापन का दंश झेल चुका है। उन्होंने कहा, “भाईचारा वहीं शुरू होता है जहां भय समाप्त होता है। यह केवल एक औपचारिक शब्द नहीं बन सकता, जिसे हर धमकी या त्रासदी के बाद दोहराया जाए, जबकि मूल समस्या जस की तस बनी रहे।”
सुरक्षा और वापसी पर गंभीर सवाल
समिति ने सवाल उठाया कि जब पंडित सुरक्षा मांगते हैं तो उन्हें हालात सुधरने का हवाला दिया जाता है, और जब वे अपनी पैतृक संपत्ति की बात करते हैं तो भविष्य की ओर देखने की सलाह मिलती है। बयान में पूछा गया, “एक पीड़ित को कश्मीर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता आखिर कितनी बार साबित करनी होगी, इससे पहले कि कश्मीर उसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करे?”
केपीएसएस ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि पूरे बहुसंख्यक समुदाय को आतंकवादियों के अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन समाज को यह आत्मनिरीक्षण करना होगा कि ऐसा माहौल कैसे बनता है जिसमें धमकियां दी जाती हैं और लोगों की निजी जानकारी लीक हो जाती है।
जांच और सुरक्षा की मांग
संगठन ने कहा कि इस धमकी को सिर्फ एक पोस्टर मानकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि इसे किसने बनाया, किसने फैलाया और कर्मचारियों की निजी जानकारी उन तक कैसे पहुंची। समिति ने इन पहलुओं की गंभीर जांच की मांग की है।
बयान के मुताबिक, किसी समाज की असली परीक्षा इस बात से होती है कि वह हत्या से पहले मिलने वाली चेतावनियों को कितनी गंभीरता से लेता है, न कि इसके बाद कितना शोक व्यक्त करता है। समिति ने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनकी निजी जानकारी की रक्षा करने और वापसी के अधिकार को न्याय व सुरक्षा का विषय बनाने की मांग की है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक कथित धमकी या इससे जुड़े आतंकी संगठन की प्रामाणिकता पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इनपुट: IANS



