वेरानियम क्लाउड: SEBI का बड़ा खुलासा — झूठे डेटा सेंटर, फर्जी कमाई और फंड डायवर्जन के आरोप में 7 साल का बैन
निवेशकों के धन के दुरुपयोग और वित्तीय आंकड़ों में हेरफेर के गंभीर आरोपों में बाजार नियामक SEBI ने वेरानियम क्लाउड लिमिटेड (VCL) और उसके प्रबंध निदेशक हर्षवर्धन हनमंत साबले पर सात साल के लिए प्रतिभूति…
निवेशकों के धन के दुरुपयोग और वित्तीय आंकड़ों में हेरफेर के गंभीर आरोपों में बाजार नियामक SEBI ने वेरानियम क्लाउड लिमिटेड (VCL) और उसके प्रबंध निदेशक हर्षवर्धन हनमंत साबले पर सात साल के लिए प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने पर रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई कंपनी के आईपीओ और राइट्स इश्यू से जुटाए गए फंड के कथित डायवर्जन और निवेशकों को भ्रामक जानकारी देने के मामले में की गई है।
सेबी ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी ने निवेशकों से जुटाए गए करोड़ों रुपये का बड़ा हिस्सा प्रमोटर समूह से जुड़ी संस्थाओं के फायदे के लिए इस्तेमाल किया। नियामक ने हर्षवर्धन साबले को 12% ब्याज के साथ 128.77 करोड़ रुपये का अवैध लाभ जमा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, कंपनी को भी निवेशकों से जुटाए गए 62.51 करोड़ रुपये की वसूली करने का आदेश दिया गया है।
जांच के केंद्र में आईपीओ और राइट्स इश्यू
सेबी की जांच का मुख्य आधार सितंबर 2022 में आया कंपनी का आरम्भिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) और उसके बाद जारी किया गया राइट्स इश्यू था। कंपनी ने आईपीओ के ज़रिए 40.39 करोड़ रुपये और फिर राइट्स इश्यू से 48.45 करोड़ रुपये जुटाए थे। सेबी के अनुसार, राइट्स इश्यू से मिली राशि का लगभग 89.83% हिस्सा प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं को भेज दिया गया, जिसमें से 32.73 करोड़ रुपये सीधे एमडी हर्षवर्धन साबले के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए।
डेटा सेंटर के दावों में मिली गड़बड़ी
वेरानियम क्लाउड ने गोवा और सावंतवाड़ी में एज डेटा सेंटर शुरू करने का दावा किया था, लेकिन यह दावा जांच में खोखला साबित हुआ। सेबी और एनएसई के निरीक्षण में सावंतवाड़ी के पते पर कोई डेटा सेंटर नहीं मिला। वहीं, गोवा स्थित सेंटर में एक महीने में सिर्फ़ छह यूनिट बिजली की खपत पाई गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वहां कंपनी द्वारा बताया गया कोई बड़ा तकनीकी संचालन नहीं हो रहा था।
आंकड़ों का मायाजाल और भ्रामक घोषणाएं
वित्तीय हेरफेर: जांच में सामने आया कि कंपनी ने दो वित्तीय वर्षों में 'अमटेलफोन इन्कॉरपोरेटेड' नामक कंपनी से 594.32 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई थी, लेकिन इन लेन-देन के समर्थन में कोई वास्तविक बैंक रसीदें नहीं मिलीं। इन्हें सिर्फ़ कागज़ी एंट्री बताया गया। इसी तरह, कंपनी की अमेरिकी इकाई, जिसकी पूंजी सिर्फ 1,000 डॉलर थी और कोई कर्मचारी नहीं था, उसे एक तिमाही में 392.11 करोड़ रुपये का राजस्व कमाते हुए दिखाया गया।
निवेशकों को गुमराह किया: सेबी ने पाया कि कंपनी ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं, जैसे फरवरी 2023 में फास्टवे ट्रांसमिशन्स का 2,683 करोड़ रुपये में अधिग्रहण का ऐलान। यह प्रस्तावित राशि कंपनी की कुल संपत्ति से लगभग 20 गुना अधिक थी। इन घोषणाओं के बाद कंपनी के राजस्व और शेयर की कीमत में भारी उछाल आया, जिसका फायदा उठाकर प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं ने ऊंचे दामों पर अपने शेयर बेचकर 128.77 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लाभ कमाया।
अन्य लोगों पर भी हुई कार्रवाई
इस मामले में सेबी ने कई अन्य लोगों पर भी जुर्माना लगाया है। हर्षवर्धन साबले पर 20.4 करोड़ रुपये और कंपनी पर 1.3 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है। एक मुखौटा इकाई के तौर पर काम करने वाली बीएम ट्रेडर्स के मालिक राज जगतानी पर 10.1 करोड़ रुपये का जुर्माना और चार साल का प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं, कंपनी के दो कार्यकारी निदेशकों और मुख्य वित्तीय अधिकारी पर 6-6 लाख रुपये का जुर्माना और एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
इनपुट: IANS



