रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

सौर ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग, अमेरिका को पीछे छोड़ बना दुनिया का दूसरा सबसे तेज़ी से बढ़ता बाज़ार

भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अमेरिका को पछाड़ दिया है। अब भारत सालाना सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला…

सौर ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग, अमेरिका को पीछे छोड़ बना दुनिया का दूसरा सबसे तेज़ी से बढ़ता बाज़ार
(फोटो: IANS)

भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अमेरिका को पछाड़ दिया है। अब भारत सालाना सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला बाज़ार बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने 37 गीगावाट की नई सौर क्षमता स्थापित की, जो देश की नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर तेज़ प्रगति को दर्शाता है।

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सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, 30 जून, 2026 तक देश की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 162.15 गीगावाट तक पहुँच गई है। यह 2014 के मुक़ाबले एक ज़बरदस्त उछाल है, जब यह क्षमता महज़ 3 गीगावाट थी। यह आँकड़ा भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलाव का प्रतीक है।

क्यों और कैसे सस्ती हुई सौर बिजली?

पिछले एक दशक में भारत में सौर बिजली की दरों में भारी गिरावट आई है, जिसने इसे आम लोगों और उद्योगों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना दिया है। इसकी एक बड़ी वजह सरकार द्वारा अपनाई गई 'ई-रिवर्स ऑक्शन' प्रणाली है। इस प्रक्रिया में कंपनियाँ सबसे कम दर पर बिजली आपूर्ति करने के लिए बोली लगाती हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सौर ऊर्जा की दरें 2010 के लगभग 18 रुपये प्रति यूनिट से घटकर रिकॉर्ड 2.44 रुपये प्रति यूनिट के स्तर पर आ गईं।

कीमतों में इस कमी का असर यह हुआ है कि भारत आज दुनिया के सबसे कम लागत वाले सौर ऊर्जा बाज़ारों में से एक है। 2025 में, यहाँ यूटिलिटी-स्केल सोलर प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन की औसत लागत (LCOE) 35 डॉलर प्रति मेगावॉट थी, जो 44 डॉलर प्रति मेगावॉट के वैश्विक औसत से काफ़ी कम है।

भविष्य की योजनाएँ और बड़े प्रोजेक्ट्स

भारत सरकार ने सौर ऊर्जा को और बढ़ावा देने के लिए हाल ही में 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' (पीएम-एसएसवाई) को मंज़ूरी दी है। 31 जुलाई, 2026 को स्वीकृत इस योजना का बजट 5,070 करोड़ रुपये है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा। इसका लक्ष्य एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) के साथ 5,000 मेगावॉट के तैरते हुए सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स (Floating Solar Projects) स्थापित करना है। इन प्रोजेक्ट्स में कम से कम दो घंटे की स्टोरेज क्षमता (10,000 मेगावॉट) होगी, जिससे राज्यों को पीक आवर्स में बिजली की माँग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की कुल स्थापित क्षमता 118.79 गीगावाट है। इनमें राजस्थान का भादला सोलर पार्क, कर्नाटक का पावगाडा सोलर पार्क और मध्य प्रदेश का रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा, छतों पर लगे सोलर सिस्टम (रूफटॉप सोलर) से 27.88 गीगावाट बिजली मिलती है।

भारत के बड़े ऊर्जा लक्ष्य

सौर ऊर्जा में यह प्रगति भारत के बड़े जलवायु लक्ष्यों का हिस्सा है। देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-Fossil Fuel) आधारित ऊर्जा क्षमता 283.46 गीगावाट हो गई है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 274.68 गीगावाट है। ग्लासगो में आयोजित कोप26 शिखर सम्मेलन में भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।

इनपुट: IANS

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News4Social टेक डेस्क

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