वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता में भारत की ऊंची छलांग, दुनिया के शीर्ष 30 देशों में हुआ शामिल
भारत के रियल एस्टेट सेक्टर ने पारदर्शिता के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे देश अब दुनिया के सबसे पारदर्शी बाजारों की सूची में और ऊपर आ गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक नई रिपोर्ट के…
भारत के रियल एस्टेट सेक्टर ने पारदर्शिता के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे देश अब दुनिया के सबसे पारदर्शी बाजारों की सूची में और ऊपर आ गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जेएलएल के 'ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स' (GRETI) में भारत ने पांच पायदान की छलांग लगाते हुए 26वां स्थान हासिल कर लिया है। इस शानदार सुधार के साथ भारत अब सूचकांक की 'पारदर्शी' श्रेणी के मध्य स्तर पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट बताती है कि भारत दुनिया के उन पांच बाजारों में शामिल है, जिन्होंने सबसे तेजी से सुधार किया है। इतना ही नहीं, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यह सबसे बड़ा सुधार करने वाला देश बनकर उभरा है। जेएलएल इंडिया की सीईओ राधा धीर ने इस प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर चौथा और पिछले 20 वर्षों में तीसरा सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया है। उनके मुताबिक, भारत अब 'अत्यधिक पारदर्शी' श्रेणी में प्रवेश करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कानूनी सुधार और निवेश का मजबूत संबंध
भारत की रैंकिंग में इस उछाल के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक हैं, जिनमें नियामकीय ढांचे में मजबूती, लेनदेन प्रक्रियाओं में सुधार और स्थिरता से जुड़े मानकों में प्रगति शामिल है। विशेष रूप से, नियामक और कानूनी मानकों के क्षेत्र में भारत की रैंकिंग 37वें से सुधरकर 19वें स्थान पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की परिपक्वता, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों का उदारीकरण और भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण इस सुधार के प्रमुख कारण रहे हैं।
पारदर्शिता बढ़ने का सीधा असर निवेश के आंकड़ों पर भी दिख रहा है। 2025 में निजी इक्विटी निवेश 17% की सालाना वृद्धि के साथ 10.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, 2026 की पहली छमाही में ही यह 4.3 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 25% अधिक है।
कमर्शियल रियल एस्टेट और REITs की भूमिका
भारत का ऑफिस रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका आकार 2024 के 104 मिलियन वर्ग फुट से बढ़कर 2026 में 164 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंचने का अनुमान है। देश का लगभग आधा ग्रेड-ए ऑफिस स्टॉक अब REIT के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। इसके अलावा, BSE रियल्टी इंडेक्स और इंडिया REIT इंडेक्स निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बेंचमार्क बन गए हैं, जिससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ी है।
रिपोर्ट में डेटा सेंटर की बढ़ती क्षमता का भी उल्लेख किया गया है, जिसके 2029 तक 1.6 गीगावाट से बढ़कर 6 गीगावाट होने का अनुमान है, जिसके लिए लगभग 110 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां पहले ही AI-तैयार डेटा सेंटरों के लिए 50 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुकी हैं।
इनपुट: IANS



