बांग्लादेश में गहराता गैस संकट: बिल पूरे, सिलेंडर खाली — ढाका के लाखों परिवार वैकल्पिक ईंधन पर निर्भर
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के कई इलाकों में लाखों परिवार पिछले दो से तीन महीनों से गंभीर गैस संकट का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि नियमित रूप से गैस बिल…
बांग्लादेश की राजधानी ढाका के कई इलाकों में लाखों परिवार पिछले दो से तीन महीनों से गंभीर गैस संकट का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि नियमित रूप से गैस बिल चुकाने के बावजूद लोगों के घरों में या तो गैस नहीं आ रही है या फिर आपूर्ति न के बराबर है। इस वजह से उन्हें खाना पकाने और अन्य ज़रूरी कामों के लिए एलपीजी सिलेंडर, बिजली या बाहर से खाना मंगवाने जैसे महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे उनका मासिक बजट बिगड़ गया है।
ढाका के निवासी इस दोहरी मार से परेशान हैं। एक तरफ वे 'टिटास गैस' कंपनी को हर महीने पूरा बिल दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें वैकल्पिक इंतज़ाम पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, लालबाग की एक गृहिणी फारिया अहमद बोरशा ने बताया कि उनके परिवार को लगभग तीन-चार महीनों से गैस नहीं मिली, फिर भी वे हर महीने 1,080 बांग्लादेशी टका का बिल चुका रहे हैं। धनमंडी जैसे अन्य इलाकों में भी यही हाल है, जहाँ लोगों ने दो महीने से गैस की आपूर्ति न होने की शिकायत की है।
मांग और आपूर्ति में भारी अंतर
यह संकट सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में गैस की भारी कमी का नतीजा है। पेट्रोबांग्ला के आंकड़ों का हवाला देते हुए 'ढाका ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में गैस की दैनिक मांग करीब 380 करोड़ क्यूबिक फीट है, जबकि आपूर्ति केवल 265 से 270 करोड़ क्यूबिक फीट ही हो पा रही है।
इस संकट को हाल ही में एक और झटका लगा जब 21 जुलाई को मोहेशखाली में एक्सेलरेट एनर्जी के फ्लोटिंग एलएनजी टर्मिनल में आग लग गई। इस घटना से गैस ग्रिड में करीब 45 करोड़ क्यूबिक फीट की दैनिक आपूर्ति बाधित हुई, जिससे पहले से मौजूद कमी और गंभीर हो गई। हालांकि, बाद में कुछ आपूर्ति बहाल हुई, लेकिन इसका असर घरों से लेकर उद्योगों और बिजली उत्पादन तक पर पड़ा है।
उद्योगों पर असर और विशेषज्ञों की चिंता
गैस की कमी ने बांग्लादेश के औद्योगिक क्षेत्र, खासकर कपड़ा, निटवेयर और रंगाई से जुड़ी फैक्टरियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई कारखानों को या तो उत्पादन बंद करना पड़ा है या वे अपनी क्षमता से बहुत कम पर काम कर रहे हैं।
इस बीच, उपभोक्ता अधिकार संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब सेवा ही नहीं मिल रही तो पूरा बिल क्यों वसूला जा रहा है। कंज्यूमर्स एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश (सीएबी) के उपाध्यक्ष एसएम नाजेर हुसैन ने कहा, “सरकार ने बिना रुकावट गैस कनेक्शन देने का वादा किया था। लेकिन आप वह सेवा दे ही नहीं रहे हैं। तो फिर पूरा बिल क्यों लिया जाना चाहिए?” उन्होंने सरकार की ओर से इस ईंधन संकट से निपटने के लिए किसी ठोस योजना की कमी की भी आलोचना की।
इनपुट: IANS



