बलूचिस्तान का संकट जिनेवा पहुँचा, UN मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान पर लगे गंभीर आरोप
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के गंभीर हनन का मुद्दा उठाया गया है। एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी…
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के गंभीर हनन का मुद्दा उठाया गया है। एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर बलूच कार्यकर्ताओं, छात्रों और लापता लोगों के परिवारों को जबरन गायब करने, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हेग स्थित 'ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस' (जीएचआरडी) ने परिषद से इस संकट पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है।
संगठन ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के नेताओं को लगातार हिरासत में रखे जाने पर भी चिंता जताई। इस संदर्भ में महरंग बलूच, बीबो बलूच और गुलजादी बलूच जैसे नेताओं की हिरासत और उनके परिवारों के खिलाफ कथित बदले की कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रक्रियाओं द्वारा पहले व्यक्त की गई चिंताओं का भी उल्लेख किया गया।
न्यायिक प्रक्रिया और सामूहिक सज़ा पर सवाल
जीएचआरडी ने बताया कि इसी साल 22 जून को पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने बीवाईसी नेताओं महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। संगठन के मुताबिक, यह फैसला जेल के अंदर जल्दबाजी में और गुप्त सुनवाई के बाद आया, जिसमें हिंसा से उनका कोई सीधा संबंध साबित करने वाला सबूत पेश नहीं किया गया।
संगठन ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी बलूच नागरिकों के परिवारों पर यह दबाव डालते हैं कि वे उग्रवाद के आरोपी रिश्तेदारों से खुद को अलग करने की लिखित घोषणा करें। ऐसा न करने पर उन्हें आतंकवाद-रोधी कार्रवाई और संपत्ति जब्त किए जाने की धमकी दी जाती है। संगठन ने इसे सामूहिक दंड की कार्रवाई बताते हुए कहा, "किसी काम की जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होनी चाहिए, जिसने वह काम किया है। रिश्तेदारों पर लगे आरोपों के लिए पूरे परिवार को सजा नहीं दी जा सकती।"
संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की अपील
जीएचआरडी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और मानवाधिकार उच्चायुक्त से पाकिस्तान पर दबाव डालने का आग्रह किया है। उनकी प्रमुख मांगों में जबरन गायब करने और सामूहिक दंड की प्रथा को तत्काल समाप्त करना, सभी लापता व्यक्तियों की जानकारी सार्वजनिक करना, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना और शांतिपूर्ण ढंग से मानवाधिकारों की वकालत करने वाले बलूच कार्यकर्ताओं को रिहा करना शामिल है।
पिछले हफ्ते बीवाईसी ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों पर बलूचिस्तान में योजनाबद्ध तरीके से सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और दमन का अभियान चलाने का आरोप लगाया था। बीवाईसी का कहना है कि हिंसा, विस्थापन और सड़कों के किनारे क्षत-विक्षत शवों का मिलना अब वहां के आम नागरिकों के लिए रोजमर्रा की सच्चाई बन चुका है।
इनपुट: IANS



