शुक्रवार, 18 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की फिर अपील, दक्षिण कोरिया बोला — अमेरिका-उत्तर कोरिया वार्ता में करेंगे मदद

दक्षिण कोरिया ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार 1950-53 के कोरियाई युद्ध को समाप्…

कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की फिर अपील, दक्षिण कोरिया बोला — अमेरिका-उत्तर कोरिया वार्ता में करेंगे मदद
(फोटो: IANS)

दक्षिण कोरिया ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार 1950-53 के कोरियाई युद्ध को समाप्त करने वाले युद्धविराम समझौते को एक स्थायी शांति व्यवस्था में बदलना चाहती है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सियोल, उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू कराने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

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यह समारोह 19 सितंबर 2018 को हुए 'प्योंगयांग संयुक्त घोषणा' की वर्षगांठ के अवसर पर नेशनल असेंबली में आयोजित किया गया था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ली का भाषण उनके राजनीतिक मामलों के विशेष सलाहकार किम क्यूंग-सू ने पढ़ा। इसी ऐतिहासिक घोषणा पर तत्कालीन दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने हस्ताक्षर किए थे।

समझौते के बावजूद बढ़ा तनाव

राष्ट्रपति ली ने अपने भाषण में स्वीकार किया कि 2018 की घोषणा के बावजूद दोनों कोरियाई देशों के बीच संवाद और सहयोग थम गया है, जबकि सैन्य तनाव बढ़ा है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि इसी अवधि में उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु हथियार क्षमता को तेजी से विकसित किया है। इस घोषणा में दोनों देशों ने सीमा पर सैन्य तनाव खत्म करने और आपसी सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया था।

अपने संबोधन में ली ने कहा, “हमारी सरकार पूरी कोशिश करेगी कि यह पहल उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने तक पहुंचे और आगे चलकर कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध खत्म करने तथा शांति व्यवस्था स्थापित करने पर बातचीत में बदले।” उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किम जोंग-उन के साथ दोबारा कूटनीतिक संवाद शुरू करने के प्रयासों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

बातचीत के लिए नई सोच की जरूरत

इससे एक दिन पहले, गुरुवार को दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने बातचीत की राह में आने वाली बाधाओं पर अहम टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि अगर उत्तर कोरिया से पहले अपने परमाणु हथियार छोड़ने की शर्त रखी जाती है, तो बातचीत कभी शुरू नहीं हो पाएगी। चुंग ने कहा, “हम पुराने तरीके को दोहराकर कोई बातचीत शुरू नहीं कर सकते, जिसमें पहले कार्रवाई करने और बाद में बदले में कुछ देने की बात होती थी और परमाणु निरस्त्रीकरण को पहली शर्त बनाया जाता था।”

चुंग ने शांति स्थापित करने के लिए एक 'बास्केट अप्रोच' का सुझाव दिया, जिसमें कई मुद्दों पर एक साथ काम किया जाए। इसमें कोरियाई युद्ध की औपचारिक समाप्ति, उत्तर कोरिया-अमेरिका संबंधों का सामान्यीकरण और दोनों कोरियाई देशों के बीच आर्थिक सहयोग जैसे कदम शामिल हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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